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Ganesh Chaturthi 2025: ग्रीन गणेशोत्सव की पहल! Solar Energy से जगमगाएंगे मंडल

मंडल ने सोलर गार्डन, सोलर ट्री और सोलर पैनल लगाकर अपनी बिजली की जरूरतें खुद पूरी करने की अनोखी पहल की है.

Ganesh Chaturthi 2025 Ganesh Chaturthi 2025

पुणे में इस बार गणेशोत्सव पर्यावरण-संरक्षण का संदेश लेकर आया है. शहर के कई गणेश मंडल सौर ऊर्जा, शाडू माटी की प्रतिमाएं और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण जैसी पहलों से एक ग्रीन गणेशोत्सव की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.

भवानी पेठ के मंडल ने बनाया सोलर गार्डन 
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भवानी पेठ स्थित श्री शिवराज मित्र मंडल ने सोलर एनर्जी के इस्तेमाल में एक नई मिसाल पेश की है. मंडल ने सोलर गार्डन, सोलर ट्री और सोलर पैनल लगाकर अपनी बिजली की जरूरतें खुद पूरी करने की अनोखी पहल की है. 

मंडल के आर्ट डायरेक्टर और इस प्रोजेक्ट के सूत्रधार पीयूष शाह ने टीओआई को बताया, "पुणे के गणेशोत्सव के इतिहास में यह पहली बार है जब कोई मंडल खुद बिजली पैदा कर रहा है."

  • सोलर ट्री में 8 लाइट्स लगाई गई हैं, प्रत्येक 50 वॉट की है.
  • इसके अलावा 165 वॉट के 4 सोलर पैनल भी लगाए गए हैं.
  • मंडल परिसर (25×35 फीट) को रोशन करने के लिए यह पर्याप्त है.
  • मंडल में चार्जिंग स्टेशन, सोलर लैम्प, सोलर फाउंटेन और सोलर कूकर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी.

भारत की सोलर एनर्जी में ग्लोबल रैंकिंग 
भारत नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में विश्व में चौथे स्थान पर है, जबकि सोलर एनर्जी के प्रोडक्शन में भारत तीसरे स्थान पर आता है. इस पहल के जरिए मंडल ने शहरवासियों को हरित ऊर्जा अपनाने का संदेश दिया है.

ऐतिहासिक श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति भी ‘ग्रीन’ 
पुणे के ऐतिहासिक श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति ट्रस्ट का इतिहास भी पर्यावरण-हितैषी परंपरा से जुड़ा है. ट्रस्ट के अध्यक्ष संजीव जावले ने बताया, "पहली प्रतिमा 1892 में पेपर पल्प, आरी की बुरादे और बाइंडर से बनाई गई थी." मंडल अब भी भक्ति गीत बजाता है, जिससे ध्वनि प्रदूषण नहीं होता.

गुलाल का इस्तेमाल पहले वर्जित था, लेकिन अब युवाओं की भावना का सम्मान करते हुए सीमित मात्रा में अनुमति दी गई है. गणपति की प्रतिमा असुर वध की मुद्रा में है, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय भावना का प्रतीक रही है.

शाडू माटी से बने गणपति की मुहिम
नवज्योत मित्र मंडल ट्रस्ट (येरवडा) ने इस बार पर्यावरण-संरक्षण की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है.

  • मंडल ने शाडू माटी की गणेश प्रतिमाएं 50 से अधिक परिवारों में मुफ्त वितरित कीं.
  • घर पर बाल्टी और कपड़े के साथ मूर्तियों का विसर्जन करने की सुविधा दी गई.
  • विसर्जन के बाद शाडू माटी की मिट्टी को पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) करने के लिए एकत्रित किया जाता है.
  • शाडू माटी गुजरात से आती है और सीमित संसाधन है. इसलिए इसका संरक्षण बेहद जरूरी है.

इस साल पुणे के कई गणेश मंडलों ने प्रदूषण कम करने और पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव मनाने की प्रतिज्ञा ली है.

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