महाराष्ट्र के सांगली जिले की आटपाडी तालुका के बनपुरी गांव से एक दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है. चोरी के महज शक के आधार पर एक पिता ने अपनी ही दो मासूम बेटियों पर अमानवीय अत्याचार किए. पूरी रात उल्टा लटकाए जाने के कारण 10 वर्षीय सानिका की मौत हो गई, जबकि 11 वर्षीय अनुजा गंभीर रूप से घायल है. यह घटना सामने आते ही इलाके में सनसनी फैल गई और लोगों में भारी आक्रोश है.
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, पड़ोसियों ने दो बहनों पर चोरी का शक जताया था. इसी शक को सच मानकर पिता दादू हैबत यमगर ने बुधवार शाम करीब 5 बजे दोनों बच्चियों के हाथ-पैर बांध दिए और घर की छत के लोहे के एंगल से उन्हें उल्टा लटका दिया. मासूम बच्चियां रातभर दर्द में कराहती रहीं और बार-बार पानी की मांग करती रहीं. लेकिन माता-पिता ने उन्हें एक बूंद पानी भी नहीं दिया और खुद सो गए.
सुबह निकला दर्दनाक सच
गुरुवार तड़के करीब 6 बजे बच्चियों के दादाजी ने उन्हें नीचे उतारा. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. 10 साल की बेटी सानिका की मौत हो चुकी थी, जबकि अनुजा बेहोश अवस्था में थी. अनुजा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जबकि सानिका को दूसरे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
परिवार की गुपचुप अंतिम संस्कार की कोशिश
घटना की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती. आरोप है कि बच्ची की मौत को छुपाने के लिए परिवार के कुछ सदस्यों ने चुपचाप अंतिम संस्कार करने की भी कोशिश की. लेकिन जब अनुजा को होश आया, तो उसने डॉक्टर को पूरी घटना बताई. कैसे उसके पिता ने उसे बांधकर उल्टा लटकाया और बेरहमी से पीटा. यही बयान मामले का बड़ा खुलासा बना.
पिता ने दादाजी पर भी हमला किया
घटना के बाद एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है. जिस दादाजी ने बच्चियों को बचाया था, उन पर भी आरोपी पिता ने कोयते से हमला कर दिया और जान से मारने की धमकी दी. यह व्यवहार परिवार में चल रहे तनाव और क्रूरता के स्तर को उजागर करता है.
पुलिस की कार्रवाई और जांच
इस खौफनाक मामले में पुलिस ने आरोपी पिता दादू हैबत यमगर को हिरासत में ले लिया है. पूरे मामले की गहन जांच जारी है, और गांव में कड़ी कार्रवाई की मांग लगातार बढ़ रही है. बनपुरी गांव में लोग सदमे में हैं. यह घटना न सिर्फ एक अपराध है, बल्कि मानवता के खिलाफ निर्ममता का चरम उदाहरण मानी जा रही है. स्थानीय लोग आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग कर रहे हैं.
(रिपोर्ट- प्रबोधिनी चिखलीकर)
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