बहुत समय पहले की बात है. वाराणसी की गलियों में एक ऐसा आम निकल कर आया, जिसका स्वाद इतना मीठा और रसदार था कि लोग उसे खाते ही उसके दीवाने हो जाते थे. लेकिन मजे की बात ये थी कि इतना स्वादिष्ट आम होने के बावजूद उसका नाम थोड़ा अजीब था. लोग असे लंगड़ा आम बुलाते थे. अब सोचो, इतना प्यारा आम और नाम ऐसा क्यों? चलो, इसकी कहानी समझते हैं.
एक बगीचे में मिला मिठा आम का पेड़
कहते हैं कि कई साल पहले बनारस में एक व्यक्ति रहते थे, जिन्हें चलने में परेशानी होती थी. लोग उन्हें प्यार से 'लंगड़ा बाबा' कहकर बुलाते थे. उनके घर के पास एक बगीचा था, जिसमें एक आम का पेड़ लगा था. एक दिन उस पेड़ पर बहुत ही स्वादिष्ट आम आए. जिसने भी वह आम खाया, उसकी मिठास भूल नहीं पाया. धीरे-धीरे आसपास के लोग उस पेड़ के आम की चर्चा करने लगे.
बस फिर क्या था, धीरे-धीरे उस आम की पहचान ही 'लंगड़ा आम' के नाम से होने लगी. समय बीतता गया, लेकिन नाम बदलने के बजाय और मशहूर होता चला गया.
क्यों इतना खास है ये आम?
लंगड़ा आम सिर्फ नाम से नहीं, स्वाद से भी अलग माना जाता है. इसका रंग बाहर से जितना हरा होता है, अंदर का गूदा उतना ही मीठा और खुशबूदार होता है. सबसे खास बात ये है कि पकने के बाद भी इसका छिलका हरा ही रहता है बल्कि पीला नहीं होता. बनारस का लंगड़ा आम देश ही नहीं, विदेशों तक पसंद किया जाता है. गर्मियों में लोग इसका इंतजार करते हैं और आम प्रेमियों की थाली में इसकी खास जगह होती है.
कब आता है बाजार में लंगड़ा आम
लंगड़ा आम का इंतजार हर साल लोग बड़ी बेसब्री से करते हैं. यह आम ज्यादा तर जून के बीच से जुलाई के आखिर तक बाजार में खूब मिलता है, हालांकि इसकी शुरुआती आवक मई के आखिरी हफ्तों में शुरू हो जाती है. यहां तक की ये आम बाजार में लंबे समय के लिए नहीं बिकता फिर भी आम प्रेमियों में इसकी खूब चर्चा रहती है.
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