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अनोखी शादी, दुल्हन लेकर पहुंची बारात, 'कन्यादान' की जगह हुआ 'वरदान', विदाई पर फूट-फूटकर रोया दूल्हा

शादी की सबसे भावुक घड़ी तब आई जब विदाई का समय हुआ. आमतौर पर दुल्हन की विदाई होती है, लेकिन इस शादी में दूल्हे की विदाई हुई. जैसे ही दूल्हा अपने घर से विदा हुआ, वह फूट-फूट कर रो पड़ा.

बेटे का दान करते माता-पिता
gnttv.com
  • सरगुजा,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:12 PM IST

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सुलपगा गांव में एक अनोखी शादी हुई है. यहां परंपराओं को चुनौती देते हुए दुल्हन खुद बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची और शादी की रस्में निभाई गईं. इस विवाह में न केवल बारात का स्वरूप बदला, बल्कि सदियों से चली आ रही कई परंपराएं भी पलटती नजर आईं.

मसी परंपरा में निभाई गई अनूठी रस्में
दुल्हन देवमुनि एक्का और दूल्हा बिलासुस बरवा का विवाह मसी परंपरा के तहत संपन्न हुआ. इस परंपरा में दुल्हन पक्ष बारात लेकर दूल्हे के घर जाता है. खास बात यह रही कि शादी में कन्यादान की जगह वरदान की रस्म निभाई गई, जहां दुल्हन को दूल्हे का हाथ सौंपा गया.

दूल्हे की विदाई, बदली परंपरा
शादी की सबसे भावुक घड़ी तब आई जब विदाई का समय हुआ. आमतौर पर दुल्हन की विदाई होती है, लेकिन इस शादी में दूल्हे की विदाई हुई. जैसे ही दूल्हा अपने घर से विदा हुआ, वह फूट-फूट कर रो पड़ा. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था.

भाई न होने से बदली परंपरा
दरअसल, दुल्हन के परिवार में कोई भाई नहीं है. पिता खेती-किसानी करते हैं और उन्हें एक बेटे की कमी खल रही थी. ऐसे में उन्होंने ऐसा रिश्ता तलाशा, जहां दामाद ही बेटे की भूमिका निभा सके. बरवा परिवार से रिश्ता तय होने के बाद दोनों पक्षों की सहमति से यह अनोखी परंपरा अपनाई गई.

-सुमित सिंह की रिपोर्ट

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