मां की यादों को खुशबू में संजोकर दुल्हन बनीं अंशुला कपूर, क्या किसी की महक हमें फिर से उसके करीब होने का एहसास करा सकती है? जानिए क्या है सेंट मेमोरी का साइंस

किसी प्रिय व्यक्ति की खुशबू कई लोगों के लिए एक हेल्दी Coping Mechanism हो सकती है. किसी दिवंगत माता-पिता की शॉल, टी-शर्ट या परफ्यूम की खुशबू कई बार भावनात्मक सहारा देती है.

Scent memory
अपूर्वा राय
  • नई दिल्ली ,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST
  • हर इंसान पर एक जैसी नहीं होती खुशबू की याद
  • क्यों एक महक सालों पुरानी यादें लौटा देती है

प्रोड्यूसर बोनी कपूर की बेटी अंशुला कपूर ने 6 जुलाई को बॉयफ्रेंड रोहन ठक्कर से शादी कर ली. ट्रेडिशनल रीति-रिवाजों से हुई शादी के बाद कपल ने मंगलवार को रिसेप्शन दिया, जिसमें दोनों परिवारों के साथ-साथ बॉलीवुड की तमाम बड़ी हस्तियां शामिल हुई. अपनी शादी में उन्होंने कोरल-पीच लहंगा, एमराल्ड-कुंदन जूलरी और मॉडर्न ब्राइडल स्टाइल से सभी का दिल जीत लिया. इस लुक की एक और खासियत ये भी थी कि उन्होंने अपनी दिवंगत मां का 42 साल पुराना गोल्डन टिश्यू और जरदोजी का दुपट्टा भी कैरी किया. 

इसके अलावा अंशुला जब दुल्हन बनकर मंडप में पहुंचीं तो उन्होंने ऐसा परफ्यूम लगाया, जिसने उन्हें अपनी दिवंगत मां मोना शौरी कपूर की मौजूदगी का एहसास करा दिया.

अंशुला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा- 'लोग कहते हैं कि खुशबू यादों को सबसे गहराई से जगा देती है. इसलिए अपनी शादी से पहले मेरे मन में एक सवाल आया...क्या कोई खुशबू किसी एहसास को हमेशा के लिए संजो सकती है? क्या वह मुझे मां की एक झप्पी की याद दिला सकती है? क्या वह मुझे उस इंसान के करीब होने का एहसास करा सकती है, जिसकी कमी मैं आज भी महसूस करती हूं? मुझे अब हर छोटी-छोटी बात याद नहीं है लेकिन मुझे आज भी याद है कि मां की बाहों में मैं कितना सुरक्षित महसूस करती थी. उनके गले लगाने का सुकून आज भी याद है और जब मैं उनके करीब होती थी, तो उनके परफ्यूम की हल्की-सी खुशबू महसूस होती थी. इसी वजह से अपनी बैचलरेट ट्रिप के दौरान सोल में मैंने उस खुशबू को फिर से बनाने की कोशिश की, जैसी मुझे मां से आती थी. और अपनी शादी के दिन, दुल्हन बनकर बाहर जाने से ठीक पहले मैंने वही परफ्यूम लगाया. कुछ पल के लिए मुझे ऐसा लगा, जैसे मैं एक बार फिर मां की बाहों में समा गई हूं...'

 

 

सवाल यह है कि क्या कोई खुशबू सचमुच हमें किसी अपने के करीब होने का एहसास करा सकती है? या यह सिर्फ हमारी भावनाओं का असर है?

क्या खुशबू सच में यादें वापस ला सकती है?
आपके साथ भी ऐसा कभी न कभी जरूर हुआ होगा. बारिश की पहली मिट्टी की महक आते ही बचपन की छुट्टियां याद आ जाती हैं. किसी पुराने परफ्यूम की खुशबू अचानक किसी दोस्त, मां, पिता या किसी खास इंसान की याद दिला देती है. इसे ही सेंट मैमोरी कहा जाता है. यानी हमारा दिमाग किसी खास खुशबू को एक याद के साथ जोड़कर सहेज लेता है. जब वही खुशबू दोबारा मिलती है, तो वह याद भी लौट आती है. यह याद खुशी की भी हो सकती है और दुख की भी.

दिमाग में कैसे बनती है 'सेंट मेमोरी'?
हमारी पांचों इंद्रियों में सूंघने की क्षमता सबसे अलग तरीके से काम करती है. जब हम कोई खुशबू महसूस करते हैं, तो उसकी जानकारी सबसे पहले ओलफैक्टरी बल्ब तक पहुंचती है. यह हिस्सा सीधे हिप्पोकैम्पस (ब्रेन के टेम्पोरल लोब में स्थित एक छोटा हिस्सा) और अमिगडाला (दिमाग के लिम्बिक सिस्टम का मुख्य हिस्सा) से जुड़ा होता है.

हिप्पोकैम्पस यादों को सहेजता है, जबकि अमिगडाला भावनाओं को. यही वजह है कि किसी खुशबू के साथ सिर्फ तस्वीर नहीं, बल्कि उससे जुड़ी भावनाएं भी लौट आती हैं. इसलिए वैज्ञानिक मानते हैं कि सूंघकर बनी यादें अक्सर देखने या सुनने से बनी यादों की तुलना में ज्यादा गहरी और भावनात्मक होती हैं. आसान भाषा में समझें तो हमारा दिमाग खुशबुओं की एक डायरी बना लेता है. पहली बार किसी खास इंसान, जगह या पल के साथ जो खुशबू जुड़ती है, वह हमेशा के लिए उस याद का हिस्सा बन सकती है.

क्या किसी अपने की खुशबू दुख से उबरने में मदद करती है?
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि किसी प्रिय व्यक्ति की खुशबू कई लोगों के लिए एक हेल्दी Coping Mechanism हो सकती है. किसी दिवंगत माता-पिता की शॉल, टी-शर्ट या परफ्यूम की खुशबू कई बार भावनात्मक सहारा देती है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई सैनिक अपने प्रियजनों के परफ्यूम से महकते रूमाल साथ लेकर युद्ध में जाते थे. इससे उन्हें अपने परिवार के करीब होने का एहसास होता था और मानसिक मजबूती मिलती थी. यादों को संजोना अच्छी बात है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह इन्हीं खुशबुओं के सहारे जीने लगे और वास्तविक जीवन से दूर होने लगे, तो वो जीवन में आगे नहीं बढ़ पाता.

क्या हर खुशबू का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा होता है?
ज्यादातर खुशबुओं का असर व्यक्तिगत अनुभवों पर निर्भर करता है. जिस परफ्यूम से आपको अपनी मां, या पिता की याद आती है, वही खुशबू किसी दूसरे व्यक्ति के लिए बिल्कुल सामान्य हो सकती है. लेकिन कुछ खुशबुएं ऐसी भी हैं, जिनका असर दुनिया भर में लगभग एक जैसा माना जाता है. जैसे सिट्रस वाली खुशबू ताजगी का एहसास कराती है. इसी वजह से इनका इस्तेमाल परफ्यूम, साबुन और घर की सफाई वाले उत्पादों में खूब किया जाता है.

क्यों बढ़ रहा है कस्टम परफ्यूम का ट्रेंड?
दुनिया भर में कस्टम या बेस्पोक परफ्यूम का चलन तेजी से बढ़ रहा है. क्योंकि अब लोग सिर्फ अच्छी खुशबू नहीं, बल्कि अपनी कहानी वाली खुशबू चाहते हैं. आज कई लोग अपनी शादी, किसी खास रिश्ते, पहली मुलाकात या किसी प्रिय व्यक्ति की याद को हमेशा के लिए एक खुशबू में कैद करना चाहते हैं. परफ्यूम एक्सपर्ट ग्राहक से उसकी पसंद, यादें, पसंदीदा फूल, मौसम और भावनाओं के बारे में बात करके एक ऐसी फ्रेगरेंस तैयार करते हैं, जो बिल्कुल उनकी पसंद की होती है.

 

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