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Coding Champion है यह 11 साल का लड़का, बना चुके हैं 10 एप, लगभग 500 छात्रों को दी मुफ्त शिक्षा

11 साल का देवांश कोडिंग चैंपियन है और फिलहाल 12वीं कक्षा में है. देवांश 5 साल की उम्र से कोडिंग कर रहा है और यह स्किल उन्हें अपने पिता से मिली है.

Devansh
gnttv.com
  • आगरा ,
  • 06 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST
  • देवांश ने 9वीं क्लास से पहले की शिक्षा किसी स्कूल में नहीं ली है
  • देवांश 10 एप बना चुके हैं जिनमें से कुछ प्ले स्टोर पर भी हैं

उत्तर प्रदेश में आगरा से करीब 15 किलोमीटर दूर बराड़ा गांव में रहने वाला देवांश धनगर कोडिंग की दुनिया का सुपर चैंपियन बन गया है. 11 साल का देवांश बहुत ही होनहार और हाई आईक्यू का बच्चा है. इसलिए ही मात्र 11 साल का यह बच्चा आज 12वीं क्लास में पढ़ रहा है. देवांश की 12वीं क्लास की पढ़ाई उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से चल रही है.

9वीं क्लास से पहले नहीं गए स्कूल
देवांश ने 9वीं क्लास से पहले की शिक्षा किसी स्कूल में नहीं ली है. देवांश ने पांच साल की उम्र में होश संभालने के साथ ही कंप्यूटर को अपने हाथ में ले लिया था और कंप्यूटर की बेसिक जानकारी खुद ही प्राप्त कर ली थी. उसके बाद कंप्यूटर पर कोडिंग का काम करना उसका पैशन हो गया. 

महज 5 साल की उम्र में देवांश ने कंप्यूटर पर कोडिंग का काम शुरू कर दिया और आज वह कोडिंग की दुनिया में शून्य से शिखर तक की यात्रा कर रहे हैं. 

बना चुके हैं 10 एप 
देवांश 10 एप बना चुके हैं जिनमें से कुछ प्ले स्टोर पर भी हैं. देवांश को अपनी प्रतिभा के बूते पर 21 जुलाई 2021 को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से बाल गौरव पुरस्कार मिला था. इसके बाद 4 दिसंबर 2021 को 'मेरी पंचायत साहित्य संस्था' ने देवांश को जयपुर में सम्मानित किया था. 

देवांश अब तक 150 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुके हैं. देवांश के पिता लाखन सिंह धनगर का कहना है कि देवांश 500 से अधिक बच्चों को मुफ्त में कोडिंग की शिक्षा दे चुके हैं. देवांश के कुछ छात्र भी ऐप बना रहे है. 

पिता से मिला गुर
देवांश के पिता ने 1999 में आरबीएस खंदारी कैंपस से एमसीए किया था. वह कंप्यूटर प्रोग्रामिंग करते थे. देवांश ने अपने पिता से इस गुण को सीखा. कोडिंग के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां उन्होंने ऑनलाइन सीखीं. देवांश दिन के करीब सात से आठ घंटे लैपटॉप पर बिताते हैं. वह नई-नई कोडिंग के साथ एडवांस एप बनाने में जुटे रहते हैं. 

घर में चलाते हैं एकेडमी
देवांश ने देवांश मारियो गेम भी बनाया है. देवांश के पिता लाखन सिंह घर मे ही एक एकेडमी चलाते हैं. जिसमें 70 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं. देवांश और उनके पिता गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देते हैं. देवांश ने कक्षा आठ तक की पढ़ाई घर से ही की, वह स्कूल नहीं गए. अब वह इंटर की परीक्षा देंगे. देवांश किसी भी गणितीय समस्या को चुटकियों में हल करने क्षमता रखते हैं. 

देवांश का सपना एमआईटी जाकर पढ़ाई करने और गरीब बच्चों के लिए मुफ्त एजुकेशन एप बनाने का है. ताकि प्रत्येक गरीब बच्चा शिक्षा पाकर अपना भविष्य संवार सकें. 

(अरविंद शर्मा की रिपोर्ट)

 

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