भारत की बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है. वो पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर नाम रोशन कर रही हैं अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं और देश का परचम पूरी दुनिया में लहरा रही हैं. चाहे बात विज्ञान की हो, राजनीति की हो, मनोरंजन की हो या हो खेल की. बेटियां अब बेटों से कहीं भी पीछे नहीं है. आज पूरा देश बेटी दिवस मना रहा है. इस खास मौके पर हम आपको भारत की उन बेटियों से परिचय कराने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी काबिलियत के बूते भारत का मस्तक अंतरराष्ट्रीय पटल पर ऊंचा किया. इसके साथ ही यह भी बताएंगे कि बेटी दिवस क्यों मनाते हैं और इससे क्या असर पड़ा है.
बेटी दिवस क्यों मनाते हैं
भारत में हर साल 25 सितंबर को बेटी दिवस मनाया जाता है. बेटियों के प्रति समाज में जिस तरह से भेदभाव देखने को मिलता है उसे खत्म करने, लिंगानुपात की समस्या को समान करने, कुरीतियों को समाप्त करने, कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बेटी दिवस मनाया जाता है. इसका असर ये हुआ है कि अब धीरे धीरे भारतीय समाज जागरूक हो रहा है और बेटियों को उनका अधिकार मिलने लगा है. बेटियों ने भी दिखा दिया कि उन्हें मौका दिया जाए तो वो कुछ भी हासिल कर सकती हैं. आज बात उन बेटियों की जिसने अलग अलग क्षेत्र में अपनी काबिलियत से मिसाल कायम की और देश में प्रेरणा बनकर उभरी.
कल्पना चावला-
हरियाणा के करनाल में जन्मी कप्लना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला हैं. वह न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर की महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं. वह पहली बार साल 1997 में अंतरिक्ष में गई और और कुल 372 घंटे वहां बिताए. इसके बाद साल 2003 में उन्हें दूसरी उड़ान के लिए चुना गया लेकिन दुर्भाग्यवश 1 फरवरी 2003 को अंतरिक्ष शटल कोलंबिया में एसटीएस-107 मिशन पर कल्पना चावला की मृत्यु हो गई.
किरण बेदी-
सिविल सेवा की क्षेत्र में किरण बेदी का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा. किरण बेदी भारत की पहली महिला आईपीएस ऑफिसर हैं. लोग उन्हें साहस और बहादुरी का प्रतीक मानते हैं. उन्हें साल 1979 में राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार, 1980 में वुमन ऑफ़ द ईयर पुरस्कार और 1994 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला. वर्तमान में वो पुडुचेरी की उपराज्यपाल हैं.
मेरीकॉम-
मणिपुर की मैंगते चंग्नेइजैंग मेरीकॉम (M.C. Mary kom) महिला मुक्केबाज हैं. मेरीकॉम बॉक्सिंग की दुनिया की वो चमकता सितारा हैं जिसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ेगी. मेरीकॉम दो बच्चों की मां हैं और उन करोड़ों महिलाओं की आदर्श हैं जो कुछ करना चाहती है. मेरीकॉम के नाम छह विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप है. विलक्षण प्रतिभा के लिए भारत सरकार उन्हें अर्जुन अवार्ड, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड, पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण जैसे अवार्डों से सम्मानित कर चुकी है.
सुष्मिता सेन-
बॉलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन भारत की पहली मिस यूनिवर्स हैं. वह मात्र 18 साल की थी जब उन्होंने 1994 में इस ख़िताब को अपने नाम किया था. उन्होंने न सिर्फ मिस यूनिवर्स जीतकर मिसाल कायम किया बल्कि 25 साल की उम्र में एक बच्ची को गोद लेकर समाज की रूढ़वादी परंपरा को तोड़ने का भी काम किया.
साइना नेहवाल-
साइना नेहवाल भारत की महिला महिला एथलीट हैं जिन्होंने देश के लिए बैडमिंटन में पदक जीता था. सायना ने यह ख़िताब 4 अगस्त 2012 को लंदन ओलंपिक में जीता था. इसके अलावा विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप और सुपर सीरीज टूर्नामेंट जीतने वाली भी पहली भारतीय खिलाड़ी हैं.