भारत में रहने वाले मिडिल क्लास लोग, उस दर्जे के लोग होते हैं, जिनकी ख्वाहिश थोड़ी हाई क्लास की तरफ झुकी हुई होती है, लेकिन उनकी सैलरी लो क्लास से ज्यादा होती है. इसी वजह से वह इस मिडिल क्लास की श्रेणी में होते हैं, यानि 'आमदनी अठन्नीं खर्चा रुपया'.
इस क्लास के सबसे बड़ी दिक्कत होती है कि इनके पैस आमदनी तो इतनी हो जाती है कि इनका जीवनयापन आसानी से हो सकता है, लेकिन कुछ ऐसे ख्वाहिशे होती हैं, जो इस आमदानी को खाती रहती है. दिक्कत की बात यह है कि इस क्लास को कई बार पता ही नहीं होता कि इन छोटी-छोटी ख्वाहिशों से आमदनी का गला कितनी जोर से दबता है. तो चलिए आपको बताते हैं उन खर्च के बारे में जिनको मिडिल क्लास सीरियली नहीं लेती है.
ऑनलाइन शॉपिंग वाली गंदी आदत
लोगों को ऑनलाइन शॉपिंग का एक बड़ा चस्का लगा होता है. जिसके फूड डिलिवरी से लेकर अमेजन-फ्लिपकार्ट से शॉपिंग करना शामिल होता है. इसमें सबसे बड़ी दिक्कत होती है कि चीज़ आपकी आंखों को काफी ज्यादा लुभा जाती है. जिसके चलते आप उसे मंगवा लेते हैं.
अब इसमें डिलिवरी चार्ज, प्लैटफॉर्म फी, पैकेजिंग चार्ज जैसे फालतू के खर्च जोड़ दिए जाते हैं. जिसकी कीमत आपकी जेब चूकाती है. अगर एक ऑर्डर पर इस तरह के कुल चार्ज की कीमत 100 बैठती है, और महीने के 5 ऑर्डर कर देते है. तो महीने का 500 का फालतू का खर्च हो जाता है.
ओटीटी प्लेटफॉर्म के सब्सक्रिप्शन
लोग अपने मनोरंजन के लिए कई ओटीटी प्लेटफॉर्म के सब्सक्रिप्शन ले लेते हैं. इसमें 2-3 प्लेटफॉर्म शामिल हो सकते है. अगर एक प्लेटफॉर्म का मंथली सब्सक्रिप्शन 1000 है तो महीने का 3000 का खर्च बैठ जाता है. लेकिन दिक्कत खर्च की नहीं, परेशानी यहां ये है कि जब आप देर रात ऑफिस से लौटते हैं तो थकान इतनी होती है कि आप इन्हें देख ही नहीं पाते. नतीजतन यह मंथली चार्ज बेकार ही जाते हैं.
ईएमआई और क्रेडिट कार्ड का जाल
मिडिल क्लास को लग्जरी प्रोडक्ट्स की ख्वाहिश होती है. इसके लिए वह क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर अपनी लिमिट के बाहर के गैजेट्स खरीद लेती है. अब जेब के ऊपर ईएमआई का खर्च और बढ़ा जाता है. साथ ही अगर चीज़े क्रेडिट कार्ड पर ली गई है, और अगर पेमेंट नहीं कर पाते किसी कारण से. तो जेब पर पड़ने की वाली पेनल्टी चपट बेवजह की होती है.
मोटी-बॉडी वाली जिम मेंबरशिप
कई बार इस क्लास के लोग शौक-शौक में सालाना जिम की मेंबरशिप ले लेते हैं. इसके पीछे उनकी सोच होती है कि सालाना लेने पर पैसा बचता है. खैर इस बात में कोई शक नहीं कि पैसा कम लगता है. लेकिन जो चीज़ ओटीटी के साथ होती है, वहीं इसके साथ भी होती है. सुबह-शाम की भागदौड़ में समय मिल ही नहीं पाता कि जिम जाया जाए. ऐसे में यहां डाले गए पैसे भी बेकार ही जाते हैं.