Pea Gardening Tips: दिसंबर में मटर घर पर उगाने का सही तरीका... दानों से लद जाएगा घर का किचन गार्डेन

क्या आपको भी मटर की खेती अच्छी लगती है? आप भी चाहते हैं कि आपका किचन गार्डेन हरी-भरी ताजी मटर से भर जाए तो आप भी यह सारे तरीके आजमा सकते हैं. इनसे आपके खेत में न केवल हरी भरी मटर आएगी बल्कि स्वादिष्ट मटर से आपका किचन गर्डेन लद जाएगा.

gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

सर्दियों का मौसम मटर उगाने के लिए बिल्कुल सही वक्त माना जाता है. ठंडी हवा, हल्की धूप और हल्की नम मिट्टी. यह तीनों मिलकर मटर के पौधे के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं जिससे पौधे को तेजी से बढ़ने में मदद मिलती है. अगर आप भी चाहते हैं कि आपके किचन गार्डन में हर दिन ताजी, मीठी और हरी मटर फले, तो आप कुछ आसान तरीका अपनाकर घर पर बहुत आसानी से मटर उगा सकते हैं. इस आर्टिकल में मटर उगाने का सही और आसान तरीका दिया गया है. आप चाहे तो इन तरीकों को अपना कर आसानी से अपने किचन गार्डेन में हरी-भरी मटर की खेती कर सकते हैं. जो स्वाद में बाजार के मटर से कहीं ज्यादा स्वादिष्ट और हेल्थी होगी. 

सही मौसम और सही किस्म चुनें
मटर की बुवाई के लिए अक्टूबर से जनवरी तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है. घर के किचन गार्डेन के लिए हाइब्रिड या जल्दी तैयार होने वाली मटर की किस्मे बेहतर हो सकती है क्योंकि इनमें फल जल्दी आते हैं और पौधा फैलने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं लेता.

मिट्टी तैयार करें 

  • मटर का पौधा नरम और हल्की मिट्टी में जल्दी उगता हैं. सही मिट्टी तैयार करने के लिए50% किचन गार्डन मिट्टी
  • 25% गोबर की खाद या कम्पोस्ट
  • 25% रेत या कोकोपीट
  • इन तीनों को अच्छे से मिलाकर मटर उगाने वाली मिट्टी तैयार कर लें.
  • यह मेल मिट्टी को हल्का रखता है, जिससे जड़ें तेजी से फैलती हैं और पौधे ज्यादा फल देते हैं.

ऐसे करें बोआई

  • बीज बोने से पहले बीज को 6-7 घंटे के लिए पानी में भिगो कर रख दें. इससे बीज जल्दी अंकुरित होते हैं
  • गमले या गार्डन की क्यारी में 1 से 2 इंच गहरी मिट्टी खोदें और बीजों को 2 से 3 इंच की दूरी पर लगा दें.
  • बीज डालने के बाद बीज के ऊपर हल्की मिट्टी डालें और बीज को ढक दें. उसके बाद थोड़ा पानी डालें. 
  • ध्यान रहे, पहली बार पानी ज्यादा न डालें वरना बीज सड़ सकते हैं.

धूप और पानी की मात्रा का ख्याल रखें 

  • मटर को रोजाना 4 से 5 घंटे की धूप में रखना जरूरी होता है
  • पानी उतना ही दें जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे और पानी भरने न पाए
  • ठंड में बार-बार पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसलिए 2 से 3 दिन में पौधे के लिए एक बार हल्की सी सिंचाई बहुत होती है.

पौधे के लिए सहारा तैयार करें 

  • मटर का पौधा ऊपर चढ़ना पसंद करता है, जिससे फल भी अच्छे आते हैं.
  • जब पौधे 6 से 8 इंच के हो जाएं, तो पौधे के लिए गमले में लकड़ी की पतली छड़ी या जूट की रस्सी का अच्छा जाल बना दें, ताकि पौधे का तना ऊपर चढ़कर अच्छे से फैल सकें
  • इससे पौधों को हवा और धूप अच्छी मिलती है और मटर की पैदावार भी बढ़ जाती है.

खाद डालने का सही तरीका
हर 15 से 20 दिनों में थोड़ा सा कम्पोस्ट डाल सकते हैं. हो सके तो रासायनिक खाद का इस्तेमाल न के बराबर करें क्योंकि मटर के पौधा ऑर्गेनिक खाद में अच्छे फल देता है और स्वाद में भी मीठा होता है.

कीटों से ऐसे बचाएं
ऐसे तो मटर के पौधे पर ज्यादा कीड़ा नहीं लगता लेकिन कभी-कभी पत्तियों पर सफेद धब्बे या छोटे कीड़े दिखाई दे सकते हैं. जिसके लिए आप घर पर बने स्प्रे का इस्तेमाल कर सकते हैं

  • एक लीटर पानी में 2 चम्मच नीम का तेल डालें
  • थोड़ा सा हल्दी मिलाएं
  • इसे 7 से 10 दिन में एक बार स्प्रे करें.

कब और कैसे तोड़ें ताज़ी मटर
बीज बोने के लगभग 60 से 70 दिन बाद पौधे पर हरी भरी फली लगने लगती है. मटर की फली जब मोटी और भरी हुई दिखने लगे, तब उसे तोड़ सकते हैं. किचन गार्डेन में उगाई हुई हरी और ताजी मटर का स्वाद दुकानों से मिलने वाली मटर से कहीं ज्यादा मीठा होता है. टाइम-टाइम पर मटर तोड़ते रहें ताकि नई मटर पौधे में आसके और उन्हें सारा पोषण मिल सके. 

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