ऑफिस में काम करते समय बॉस का बिहेवियर और उनकी बातें वर्कर के कॉन्फिडेंस पर असर डाल सकती हैं. कई बार बॉस गुस्से में ऐसी बातें कह देते हैं, जो वर्कर को बुरी लगती हैं. बार-बार सबके सामने डांटना या काम में गलती होने पर गलत तरीके से डांटना भी परेशानी बढ़ा सकता है. इसका असर धीरे-धीरे काम करने की ताकत और मन की शांति पर पड़ने लगता है. ऐसे में जरूरी है कि आप चुप रहने के बजाय सही तरीके से अपनी बात रखें.
बॉस की बातों का काम पर पड़ सकता है असर
अगर बॉस की बातें आपको बार-बार दुख पहुंचाती हैं, तो काम में मन लगाना मुश्किल हो सकता है. इससे आत्मविश्वास कम होने लगता है और छोटी-छोटी गलतियां होने का डर भी बना रहता है. कई कर्मचारी नौकरी जाने के डर से अपनी परेशानी नहीं बताते. लेकिन समस्या को लंबे समय तक दबाकर रखना सही नहीं है. सम्मान के साथ अपनी बात कहने से स्थिति को बेहतर बनाने का मौका मिल सकता है.
बातचीत के लिए सही समय चुनें
बॉस से बात करते समय समय का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. जब बॉस गुस्से में हों या काम का दबाव ज्यादा हो, तब अपनी परेशानी बताने से बचें. ऐसा समय चुनें, जब वे आराम से आपकी बात सुन सकें. कोशिश करें कि बातचीत अकेले में हो, ताकि किसी के सामने बहस या शर्मिंदगी की स्थिति न बने.
शिकायत नहीं, अपनी परेशानी बताएं
बातचीत शुरू करते समय सीधे बॉस पर आरोप लगाने से बचें. शांत भाषा में बताएं कि उनकी कुछ बातों से आपको कैसा महसूस होता है. उदाहरण के लिए, आप कह सकते हैं, "जब मेरी गलती सबके सामने बताई जाती है, तो मेरा आत्मविश्वास कम होता है. अगर आप मुझे अलग से समझाएं, तो मैं अपनी गलती सुधारने पर बेहतर ध्यान दे पाऊंगा." इस तरह आप अपनी बात भी रखेंगे और बॉस को अपनी परेशानी समझने का मौका भी मिलेगा.
अपनी बात साफ और शांति से रखें
बॉस को बताएं कि आप काम में सुधार करना चाहते हैं और उनके सुझावों को समझने के लिए तैयार हैं. साथ ही, यह भी बताएं कि आपको किस तरह का बिहेवियर परेशान करता है. बातचीत के दौरान गुस्सा करने, ऊंची आवाज में बोलने या पुरानी बातों को बार-बार दोहराने से बचें.
अगर बातचीत के बाद भी बॉस का बिहेवियर नहीं बदलता, तो तारीख और घटना के साथ जरूरी जानकारी लिखकर रखें. जरूरत पड़ने पर कंपनी के एचआर विभाग से संपर्क करें.