वंदे भारत एक्सप्रेस में कैप्चर किया गया एक ऐसा वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जो सटायर से भरा हुआ है. इस वीडियो में एक मां अपनी यात्रा का एक्सपीरियंस शेयर करते मज़ाकिया अंदाज़ में बताती है कि उनकी छोटी बच्ची की रिजर्व्ड सीट पर बच्ची की जगह एक जोड़ी चप्पल बैठी है. महिला का यह तंज कुछ लोगों को मज़ेदार लगा, तो कुछ ने इसे गैर-ज़रूरी शिकायत बताकर आलोचना की.
यात्रा का किस्सा और औकात वाला तंज
वीडियो में महिला बताती है कि उन्होंने अपने, पति और बच्चे के लिए तीन सीटें बुक कराई थीं. सफर करीब सात से आठ घंटे का था और प्रति एडल्ट टिकट का किराया लगभग 1,500 से 1,700 रुपए था.
बच्चा सीट पर बैठने के बजाय माता-पिता की गोद में दिखाई देता है, जबकि रिजर्व्ड सीट पर एक चप्पल रखी हुई है. इसी पर इशारा करते हुए मां कहती हैं कि 100 रुपए की चप्पल प्रीमियम सीट का आनंद ले रही है और बच्चा गोद में बैठा है. जिसे वह औकात का मामला बताते हुए हंसी-मज़ाक में कहती हैं.
हंसी-मज़ाक या हक़दारी? लोगों का रिएक्शन
वीडियो को अब तक लगभग 784 हज़ार बार देखा जा चुका है. कुछ यूज़र्स ने इसे सटायर के रूप में लिया, तो कई लोगों ने इसे हक़ जताने वाली सोच बताकर आलोचना की. एक यूज़र ने मज़ाकिया लहजे में लिखा कि कम से कम चप्पल का सफ़र तो यादगार हो गया. वहीं दूसरे ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे के लिए सीट जरूरी नहीं होती और किसी ने महिला को सीट लेने के लिए मजबूर नहीं किया था.
हंसी-मज़ाक बना सामाजिक बहस
कुछ कमेंट्स और भी सटायर से भरे रहे. किसी ने कहा कि वीडियो बनाने से बेहतर होता कि किसी ज़रूरतमंद को सीट दे दी जाती, तो किसी ने सरकारी व्यवस्था को घसीटते हुए सटायर किया. कुल मिलाकर, यह वीडियो एक साधारण मज़ाक से शुरू होकर सार्वजनिक वाहन, व्यवहार और व्यक्तिगत अपेक्षाओं पर चल रही ऑनलाइन बहस का हिस्सा बन गया है.