भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल अमृतसर का Golden Temple अपनी खूबसूरती और आध्यात्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. इसे श्री हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है. हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. मंदिर की सुनहरी चमक देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या पूरा Golden Temple असली सोने से बना है? चलिए आपको बताते हैं इसका सही जवाब...
महाराजा रणजीत सिंह ने कराई थी सोने की सजावट
Golden Temple के स्वर्णीकरण में सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह की अहम भूमिका मानी जाती है. साल 1830 के आसपास उन्होंने मंदिर के प्रमुख हिस्सों को सोने से सजाने की पहल की थी. उस समय करीब 150 से 162 किलोग्राम 24 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में इस सोने की कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई जाती है. खास बात यह है कि उस समय इस्तेमाल किया गया सोना 24 कैरेट था, जो सामान्य गहने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने से ज्यादा शुद्ध होता है.
बाद में फिर चढ़ाया गया सैकड़ों किलो सोना
समय के साथ मंदिर की मरम्मत और सजावट का काम भी किया गया. साल 1995 से 1999 के बीच Golden Temple के नवीनीकरण के दौरान करीब 500 किलोग्राम अतिरिक्त 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई. यह सोना मंदिर के गुंबद, दरवाजों, दीवारों और अंदर की छत जैसे कई हिस्सों पर लगाया गया.
पूरा मंदिर सोने का है?
Golden Temple की पूरी इमारत सोने से नहीं बनी है. इसमें संगमरमर और तांबे का भी इस्तेमाल हुआ है. सोने की परत इसकी सुंदरता और भव्यता को बढ़ाती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार मंदिर में कुल मिलाकर करीब 662 से 750 किलोग्राम तक 24 कैरेट सोने के इस्तेमाल का अनुमान लगाया जाता है. आज के समय में इसकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये हो सकती है. यही सुनहरी आभा Golden Temple को दुनिया के सबसे आकर्षक और आध्यात्मिक धार्मिक स्थलों में खास पहचान देती है.
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