करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं. इस साल 29 अक्टूबर, गुरुवार को करवा चौथ मनाया जाएगा. व्रत की शुरुआत सुबह सरगी खाने से होती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है. हालांकि, पूरे दिन बिना खाना और पानी पिए रहना हर महिला के लिए सही नहीं होता. कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में निर्जला व्रत रखने से परेशानी बढ़ सकती है. आइए जानते हैं किन परिस्थितियों में महिलाओं को करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए.
स्तनपान कराने वाली महिलाएं
बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाओं के शरीर को पर्याप्त पोषण और तरल पदार्थों की जरूरत होती है. लंबे समय तक पानी नहीं पीने से थकान और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. ऐसे में मां और बच्चे की सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है.
गर्भवती महिलाएं
गर्भावस्था के दौरान महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त पोषण और पानी की जरूरत होती है. लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से डिहाइड्रेशन, चक्कर और कमजोरी हो सकती है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. किसी भी तरह का जोखिम होने पर निर्जला व्रत से बचना बेहतर है.
पीरियड्स के दौरान महिलाएं
पीरियड्स के दौरान कुछ महिलाओं को पेट दर्द, थकान, कमजोरी या अधिक रक्तस्राव की समस्या होती है. ऐसी स्थिति में निर्जला व्रत रखने से परेशानी बढ़ सकती है. इस दौरान व्रत रखना है या नहीं, इसका फैसला अपनी सेहत को ध्यान में रखकर करें. पूजा-पाठ को लेकर परिवार की परंपराओं का पालन भी अपनी मान्यता के अनुसार किया जा सकता है.
डायबिटीज से पीड़ित महिलाएं
डायबिटीज में लंबे समय तक खाली पेट रहने से ब्लड शुगर का स्तर घट या बढ़ सकता है. खासकर इंसुलिन या कुछ दवाएं लेने वाली महिलाओं के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है. ऐसी महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए.
दिल की बीमारी से परेशान महिलाएं
हार्ट डिजीज से पीड़ित महिलाओं को खानपान और पानी पीने के मामले में सावधानी बरतनी पड़ती है. निर्जला व्रत से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो सकती है, जिससे परेशानी बढ़ सकती है. इसलिए व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें.
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