समाजसेवा के लिए जरूरी नहीं कि कोई बड़ा मंच हो, बड़ा बजट हो या बड़े आयोजन किए जाएं. अगर हुनर और सेवा का भाव हो तो रोजमर्रा का काम भी बदलाव की वजह बन सकता है. कोटा में ऐसा ही उदाहरण पेश कर रहा है बालिता क्षेत्र में रहने वाला एक दंपती, जिसने कैंची और कंघी को ही समाजसेवा का जरिया बना लिया है. बृजेश कुमार सेन और उनकी पत्नी ममता सेन सरकारी स्कूलों में पहुंचकर बच्चों की निःशुल्क हेयर कटिंग कर रहे हैं.
आमतौर पर सरकारी स्कूलों में समाजसेवी संस्थाओं की ओर से किताबें, बैग, यूनिफॉर्म, फर्नीचर या अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन बृजेश और ममता ने बच्चों की जरूरत को एक अलग नजरिए से समझा. उनका मानना है कि साफ-सुथरा रहना, आत्मविश्वास के साथ स्कूल आना और किसी बच्चे को उसके आर्थिक हालात की वजह से अलग महसूस न होने देना भी समाजसेवा का हिस्सा है.
11 जुलाई 2024 से शुरू हुआ सफर
बृजेश कुमार सेन का अपना हेयर सैलून है और उनकी पत्नी ममता सेन ब्यूटी पार्लर चलाती हैं. दोनों ने अपने इसी हुनर को समाज के जरूरतमंद बच्चों के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया. 11 जुलाई 2024 को इस अभियान की शुरुआत हुई. इसके बाद से यह सेवा किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही. बृजेश अपनी टीम के साथ सप्ताह में चार दिन अलग-अलग सरकारी स्कूलों में कैंप लगाते हैं. स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्य की अनुमति के बाद टीम स्कूल पहुंचती है और बच्चों की मुफ्त हेयर कटिंग करती है.
116 स्कूल, आश्रम और करीब 15,500 बच्चों की कटिंग
इस अभियान का दायरा अब काफी बढ़ चुका है. बृजेश और उनकी टीम अब तक करीब 116 सरकारी स्कूलों और आश्रमों में लगभग 15,500 बच्चों की निःशुल्क हेयर कटिंग कर चुकी है. उनकी टीम में सैलून पर काम करने वाले छह लोग भी शामिल हैं. एक दिन में करीब 300 से 350 बच्चों की कटिंग की जाती है. लड़कों की हेयर कटिंग टीम के सदस्य करते हैं, जबकि छात्राओं की हेयर कटिंग की जिम्मेदारी ममता सेन संभालती हैं.
मकसद सिर्फ बाल काटना नहीं, बच्चों में बराबरी का भाव पैदा करना
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसके पीछे सिर्फ मुफ्त हेयरकट देना मकसद नहीं है. बृजेश ने देखा कि सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे पढ़ते हैं, जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं. कई बार आर्थिक परिस्थितियों के कारण बच्चे समय पर हेयर कटिंग नहीं करवा पाते. वहीं कुछ बच्चे अलग-अलग तरह की स्टाइलिश हेयर कटिंग करवाकर स्कूल पहुंचते हैं. ऐसे में बृजेश ने बच्चों के बीच एक जैसी और स्कूल के अनुरूप हेयर कटिंग की पहल शुरू की, ताकि किसी बच्चे को उसकी आर्थिक स्थिति या पहनावे-रूप के आधार पर अलग महसूस न हो.
हेयर कट के साथ स्वच्छता का पाठ
स्कूल में कैंप के दौरान बच्चों की हेयर कटिंग करने के साथ उन्हें व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में भी समझाया जाता है. साफ-सुथरे कपड़े पहनने, नियमित रूप से बालों की देखभाल करने और स्वच्छ रहने के फायदे बताए जाते हैं. बृजेश का कहना है कि जब बच्चा साफ-सुथरा और आत्मविश्वास से भरा महसूस करता है तो उसका मन पढ़ाई और स्कूल की गतिविधियों में लगाने में भी मदद मिलती है. इस तरह उनका छोटा-सा प्रयास स्वच्छता, अनुशासन और आत्मविश्वास से भी जुड़ गया है.
छात्राओं ने कहा- हमारे भी बाल काटिए
शुरुआत में यह अभियान सिर्फ लड़कों की हेयर कटिंग से शुरू हुआ था. लेकिन कुछ समय बाद स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं ने भी बृजेश से मुफ्त हेयर कटिंग की मांग शुरू कर दी. बच्चियों का कहना था कि महिलाओं की हेयर कटिंग के लिए बाहर काफी पैसे खर्च होते हैं. बच्चों की इस बात को बृजेश और उनकी पत्नी ममता ने गंभीरता से लिया. इसके बाद ममता सेन इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ीं और छात्राओं की मुफ्त हेयर कटिंग की जिम्मेदारी संभाल ली. अब पति-पत्नी दोनों मिलकर इस सेवा को आगे बढ़ा रहे हैं.
हर सप्ताह चार दिन, बिना किसी प्रचार के सेवा
बृजेश और ममता के लिए यह कोई एक-दो दिन का अभियान नहीं है. सप्ताह में चार दिन वे अलग-अलग स्कूलों में पहुंचते हैं और लगातार बच्चों की हेयर कटिंग करते हैं. खास बात यह है कि इस सेवा के पीछे किसी तरह के बड़े प्रचार या दिखावे की इच्छा नहीं है. दोनों अपने पेशे के जरिए जरूरतमंद बच्चों तक पहुंच रहे हैं और अपनी कमाई के हुनर का एक हिस्सा समाज को वापस दे रहे हैं.
कैंची से सिर्फ बाल नहीं कट रहे, सोच भी बदल रही है
कोटा के इस दंपती की कहानी इसलिए खास है क्योंकि यहां समाजसेवा किसी अलग संसाधन से नहीं, बल्कि अपने हुनर से की जा रही है. बृजेश और ममता ने यह साबित किया है कि समाज के लिए कुछ करने के लिए जरूरी नहीं कि आपके पास बहुत पैसा हो. आपके पास जो हुनर है, उसी को किसी जरूरतमंद के काम में लगाया जा सकता है. आज उनकी टीम जब सरकारी स्कूल में पहुंचती है तो बच्चों के चेहरों पर उत्साह नजर आता है. कुछ देर के लिए स्कूल का माहौल भी बदल जाता है. बच्चे अपनी बारी का इंतजार करते हैं और हेयर कटिंग के बाद खुद को नए अंदाज में देखकर खुश होते हैं. लेकिन इस मुस्कान के पीछे सिर्फ नया हेयरकट नहीं है. इसके पीछे यह संदेश भी है कि सुविधाएं भले अलग हों, लेकिन सम्मान और बराबरी का हक हर बच्चे का है.
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