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महिषासुर का साया आने का दावा, 70 साल के बुजुर्ग खाने लगते हैं घास और भूसा

यूपी के महराजगंज में एक अनोखा मामला सामने आया है. नाग पंचमी के दिन एक 70 साल के बुजुर्ग पर महिषासुर के आने का दावा किया जा रहा है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो बुजुर्ग खास, भूसा खा रहा है.

Maharajganj News
अमितेश त्रिपाठी
  • महराजगंज,
  • 19 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:54 PM IST

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जिले के रुदलापुर गांव में नागपंचमी के दिन हर तीन वर्ष में एक ऐसी घटना सामने आती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों हुजूम उमड़ पड़ता है. ग्रामीणों का दावा है कि गांव के ही रहने वाले 70 वर्षीय बुद्धिराम के शरीर में हर तीन वर्ष में नाग पंचमी के दिन बुद्धिराम के शरीर मे महिषासुर’ का प्रवेश होता है. जिसके बाद वे कथित तौर पर जानवरों के चारे यानी भूसा, घास, जूठन खाने लगते हैं. दावा तों यहां तक है कि वे चार हौदियों में रखा घास, भूस तक खा जाते हैं. आखिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आस्था है या अंधविश्वास या फिर कोई चिकित्सकीय अथवा वैज्ञानिक वजह, जिसका रहस्य अभी तक अनसुलझा है.

70 साल के बुजर्ग पर महिषासुर के आने का दावा-
ग्रामीणों का माने तो करीब 70 वर्षीय बुद्धिराम वर्ष 1975 से इस तरह की घटना का हिस्सा रहे हैं. उनका दावा है कि नागपंचमी के दिन उनके ऊपर महिसासुर की सवारी आती है. इसके बाद वे आम दिनों में के इंसानी व्यवहार से अलग होकर जानवरों के लिए रखे गए भूसे और घास को खाने लगते हैं. 

समय माता मंदिर में होती है घटना-
गांव में स्थित समय माता मंदिर में पूजा-पाठ के दौरान ही यह घटनाक्रम शुरू होता है. जिसके बाद बुद्धिराम कथित तौर पर नाद में रखे पानी के साथ भूसा और घास खाने लगते हैं. इस दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में हुजूम उमड़ पड़ता है. इस दौरान कई लोग उन्हें अपने हाथों से केला, घास, भूसा और लड्डू खिलाते हैं. 

मन्नतें पूरी होने का दावा-
कुछ ग्रामीणों का दावा है कि यहां मांगी गई मनौतियां पूरी होती हैं और इसी आस्था के चलते हर तीन साल में बड़ी संख्या में लोग यहां उमड़ पड़ते है. हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई वैज्ञानिक पुष्टि सामने नहीं आई है. कारण यही है कि इस पूरे घटनाक्रम को केवल आस्था के नजरिए से देखने के बजाय वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच के नजरिए से देखना भी जरूरी हो जाता है.

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