मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के सुठालिया कस्बे में स्थित पुलिस थाना अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है. यहां किसी भी पुलिस अधिकारी या जवान की नई पोस्टिंग होती है, तो उसे सबसे पहले पुलिस वाली माताजी के मंदिर में हाजिरी लगानी होती है. इसके बाद ही वह ड्यूटी संभाल सकता है. कहा जाता है कि यह परंपरा आज की नहीं, बल्कि कई दशकों से चली आ रही है और पुलिसकर्मी इसे पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं.
1946 में दीवार से प्रकट हुईं मां चामुंडेश्वरी
मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम दुबे के अनुसार, सन 1946 में जब सुठालिया के पास ग्राम मऊ में पुलिस थाना बनाया जा रहा था, उसी दौरान मंदिर निर्माण की योजना बनी. इसी बीच थाने की दीवार से मां चामुंडेश्वरी के प्रकट होने की मान्यता है. तब से यह स्थान आस्था का केंद्र बन गया और लोग इसे चमत्कारी मानने लगे. आज भी माता की प्रतिमा दीवार से ही दर्शन देती है.
थाना शिफ्ट करने पर हुए चमत्कार
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, एक समय थाने को यहां से हटाने की कोशिश की गई थी. लेकिन जैसे ही इसे शिफ्ट किया गया, पुरानी बिल्डिंग गिर गई और अधिकारियों के आवास पर पत्थर गिरने जैसी घटनाएं सामने आईं.
इसके बाद थाने को वापस उसी स्थान पर लाया गया. बाद में माता की इच्छा मानकर करीब 5 किमी दूर सुठालिया में नया थाना बनाया गया, लेकिन उसका नाम आज भी “मऊ-सुठालिया” ही रखा गया.
जलता दीपक खुद लगाने लगा चक्कर
मंदिर से जुड़ा एक चर्चित चमत्कार 4 मार्च 1975 का बताया जाता है. उस समय के थाना प्रभारी सरदार कर्मसिंह ने अपने रोजनामचे में इसका उल्लेख किया था.
बताया जाता है कि रात के समय एक जलता हुआ दीपक अपने आप मंदिर के चक्कर लगा रहा था. पहले तो सिपाही को यह दिखाई नहीं दिया, लेकिन आंख धोने के बाद उसने भी वही दृश्य देखा. इस घटना को बाद में रिकॉर्ड में दर्ज कर फ्रेम में सुरक्षित रखा गया.
हर नए पुलिसकर्मी के लिए जरूरी है आमद
आज भी इस थाने में जब किसी पुलिसकर्मी की पहली पोस्टिंग होती है, तो वह सबसे पहले माता के दरबार में हाजिरी देता है. इसके बाद ही उसकी ड्यूटी आधिकारिक रूप से शुरू मानी जाती है. पुलिसकर्मियों के अनुसार, यह परंपरा आस्था और विश्वास का प्रतीक है, जिसे सभी मानते हैं.
नवरात्र में पुलिस संभालती है व्यवस्था
मंदिर में हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान भव्य आयोजन किए जाते हैं. इन अवसरों पर विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं. खास बात यह है कि मंदिर की पूरी व्यवस्था पुलिस स्टाफ के सहयोग से ही संचालित होती है.
रिपोर्ट-पंकज शर्मा
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