उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक ऐसा कैफे है, जहां पहुंचते ही आपको कैफे नहीं, बल्कि अपना स्कूल याद आने लगेगा. यहां दीवारों पर ब्लैकबोर्ड है, टेबल नंबर की जगह रोल नंबर और मेन्यू कार्ड… वो भी किसी रेस्टोरेंट का नहीं, बल्कि मार्कशीट की शक्ल में. खाने के नाम भी ऐसे कि पढ़ते ही स्कूल के दिन याद आ जाएं. इस खास कैफे को फाउंडर आशीष पांडे हैं.
नोएडा का अनोखा कैफे-
ये कोई स्कूल की क्लास नहीं, बल्कि नोएडा के सेक्टर-63 में बना एक अनोखा कैफे है. इसका नाम The Attendance Sheet Cafe है और इसका पूरा कॉन्सेप्ट ही स्कूल की यादों पर आधारित है.
अलग है कैफे का नजारा-
यहां पहुंचते ही आपको क्लासरूम जैसा माहौल नजर आता है. डेस्क… ब्लैकबोर्ड… ग्रीन बोर्ड… किताबों की लाइब्रेरी… यहां तक कि टेबल नंबर भी स्कूल की तरह रोल नंबर के तौर पर दिए गए हैं.
खास है मैन्यू कार्ड-
लेकिन इस कैफे की सबसे खास चीज इसका मेन्यू कार्ड है. यहां मेन्यू किसी रेस्टोरेंट के कार्ड की तरह नहीं, बल्कि मार्कशीट की तरह डिजाइन किया गया है. ग्राहक को इसी मार्कशीट में अपनी पसंद की डिश पर टिक लगाना होता है और फिर इसे स्टाफ को देना होता है और खाने के नाम भी पूरे स्कूल वाले अंदाज में रखे गए हैं. Home work तड़का मैगी, ट्यूशन वाली मैगी, स्टाफ रूम प्रिंसिपल चाय, केमिस्ट्री साइंस लैब मॉकटेल्स और बैकबेंचर मोमोज, ऐसी ही बहुत सारी चीजें आपको यहां मेन्यू में दिखाई देती है.
स्कूल की याद से जुड़ी है हर एक चीज-
यानी खाना ऑर्डर करने से लेकर उसके नाम तक… हर चीज स्कूल की यादों से जुड़ी है. कैफे में एक खास Attendance Wall भी बनाई गई है, जहां ग्राहक अपनी पसंदीदा डिश खाने के बाद चॉक से अपना नाम, स्कूल का रोल नंबर और पसंदीदा स्नैक लिखकर खुद को ‘Present’ मार्क कर सकते हैं.
कैफे की दीवारों पर स्कूल के वो पल भी दोबारा बनाए गए हैं, जिन्हें शायद आज भी याद करके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. 'May I come in, Sir?'... 'Stand up on the bench'... 'Silence in the class'…और होमवर्क चेक करवाने जैसी यादें.
साइंस लैब से लेकर लाइब्रेरी तक-
यहां साइंस लैब और लाइब्रेरी भी बनाई गई है. साइंस लैब में स्कूल प्रोजेक्ट की तर्ज पर अलग-अलग मॉडल भी रखे गए हैं. स्कूल की यादें हर उम्र के लोगों के साथ जुड़ी होती हैं. इसी सोच के साथ कैफे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लोग यहां आकर अपने स्कूल के दिनों को दोबारा महसूस कर सकें. यहां एक कन्फेशन बोर्ड भी है, जहां आप अपने स्कूल की कोई वो मेमोरी लिख सकते हैं, जो आपने कभी किसी को न बताई हो.
यानी नोएडा का ये कैफे सिर्फ खाने-पीने की जगह नहीं, बल्कि बचपन की यादों को फिर से जीने का एक अनुभव है. जहां मेन्यू बन गया है मार्कशीट, बिल बन गया है रिजल्ट, टेबल बन गई है रोल नंबर और ग्राहक कुछ देर के लिए फिर से बन जाता है स्कूल का छात्र. ये कैफ़े आपको आपकी बचपन की लंबी यात्रा पर लेकर जाएगा.
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