अमेरिका के ओरेगन के एक किसान ने खेती का ऐसा तरीका अपनाया, जिसमें फसलों को नियमित रूप से पानी देने की जरूरत ही नहीं पड़ी. किसान ने करीब 40 साल तक बिना सिंचाई के खेती करके दिखाया कि अगर मिट्टी में मौजूद पानी को सही तरीके से बचाया जाए तो उससे पूरे सीजन फसल उगाई जा सकती है. इस तकनीक को ड्राई फार्मिंग (Dry Farming) कहा जाता है. ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी की 2014 की एक रिपोर्ट में किसान के करीब चार दशक के अनुभव को दर्ज किया गया था.
क्या होती है ड्राई फार्मिंग?
ड्राई फार्मिंग का मतलब यह नहीं है कि खेत में पानी देना पूरी तरह बंद कर दिया जाए और पौधों को अपने हाल पर छोड़ दिया जाए. इसमें असली काम मिट्टी की नमी को संभालने का होता है. सर्दियों और वसंत में मिट्टी में जमा होने वाले पानी को इस तरह सुरक्षित रखा जाता है कि गर्म और सूखे मौसम में पौधों की जड़ों को वह नमी मिलती रहे.
किसान ने कैलिफोर्निया में इस तरीके से खेती शुरू की थी. बाद में 2007 में वह ओरेगन के वेनेटा के पास 9.6 एकड़ जमीन पर आ गया. इस जमीन पर उसके पास पानी का अधिकार नहीं था. इसके बावजूद उसने अपने परिवार के लिए खेती की और यूजीन की छोटी किराना दुकानों में अपनी उपज बेची. यहां उसने ऑर्गेनिक टमाटर, आलू, विंटर स्क्वैश, लहसुन और अलग-अलग तरह की बीन्स उगाईं.
मिट्टी तैयार करना था सबसे बड़ा काम
इस खेती में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मिट्टी की थी. किसान वसंत में बारिश के बाद आने वाले पहले अच्छे सूखे दौर का इंतजार करता था. जब मिट्टी इतनी नम होती कि दबाने पर एक साथ रहे, लेकिन इतनी सूखी भी हो कि आसानी से टूट जाए, तब वह उसकी जुताई करता था. इसके बाद खेत को दो-तीन हफ्तों के लिए छोड़ दिया जाता और फिर दोबारा मिट्टी तैयार की जाती. इस प्रक्रिया से ऐसी मिट्टी तैयार होती थी, जो पौधों की जड़ों के आसपास नमी को लंबे समय तक रोक सके. उसके खेत की मिट्टी मुख्य रूप से वेनेटा लोम थी, जबकि नीचे मौजूद चिकनी मिट्टी की परत पानी को रोकने में मदद करती थी. किसान ने मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए भेड़, हंस और लेग्यूम कवर क्रॉप्स का भी इस्तेमाल किया.
पौधों के बीच ज्यादा दूरी, कम पानी की बर्बादी
बीज बोने के बाद भी किसान नमी बचाने पर पूरा ध्यान देता था. बीजों को मिट्टी में डालकर उनके ऊपर पैर रखने से मिट्टी और बीज का संपर्क मजबूत होता था. पौधों के आसपास करीब 4 से 6 इंच तक मिट्टी को ढीला रखा जाता था, जिससे जड़ों को फैलने की जगह मिले और पानी जमीन के अंदर बना रहे. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी भी रखी जाती थी, ताकि सीमित पानी और पोषक तत्वों के लिए पौधों में ज्यादा प्रतिस्पर्धा न हो. दिलचस्प बात यह थी कि दूरी इतनी रखी जाती थी कि किसान अपने ट्रैक्टर से आसानी से खेत में काम कर सके और ज्यादातर काम अकेले संभाल सके.
हर जगह काम नहीं करेगी यह तकनीक
ड्राई फार्मिंग पानी की समस्या का कोई जादुई समाधान नहीं है. बहुत रेतीली या कम गहराई वाली मिट्टी, जिसमें पानी रोकने की क्षमता कम हो, वहां यह तरीका मुश्किल हो सकता है. कुछ फसलें भी बिना सिंचाई के अच्छी तरह नहीं उग पातीं. फिर भी पानी की कमी, महंगी सिंचाई और पानी के अधिकार से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे किसानों के लिए यह तरीका एक विकल्प हो सकता है. ओरेगन के किसान के 40 साल के प्रयोग ने दिखाया कि सही मिट्टी, सही फसल, उचित दूरी और नमी के बेहतर प्रबंधन से बिना नियमित सिंचाई के भी खेती मुमकिन है.
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