मोदी-मेलोनी ने लगाया Black Mulberry plant, घर पर उगा सकते हैं ये मीठे फल वाला पेड़... 6 महीने में आएंगे फल!

प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने रोम में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत शहतूत का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक रिश्तों का संदेश दिया. इसके बाद से शहतूत का पौधा एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

Pm Narendra Modi And Italy Pm Meloni Plant Black Mulberry
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:57 AM IST

प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने रोम में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत शहतूत का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक रिश्तों का संदेश दिया. इसके बाद से शहतूत का पौधा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. भारत में 'कृष्ण टूट' के नाम से मशहूर शहतूत स्वाद, सेहत और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. खास बात यह है कि अब इसे केवल बड़े बगीचों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि लोग इसे अपनी छत और बालकनी में भी आसानी से उगा सकते हैं.

गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सही देखभाल और पोषक मिट्टी मिलने पर शहतूत का पौधा गमले में भी तेजी से बढ़ता है और करीब 6 महीने में फल देने लायक बन सकता है. इसके लिए कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर घर में सहतूत का पौधा कैसे लगा सकते हैं.

सही मौसम का चुनाव जरूरी
शहतूत का पौधा लगाने के लिए फरवरी से मार्च और जुलाई से अगस्त का समय सबसे बेहतर माना जाता है. बसंत के मौसम में तापमान संतुलित रहता है, जिससे पौधे की जड़ें तेजी से फैलती हैं और नई पत्तियां निकलती हैं. वहीं मानसून के दौरान मिट्टी में नमी बनी रहती है, जो पौधे की ग्रोथ को तेज करती है.

गमले का रखें खास ख्याल
पौधे की जड़ें तेजी से फैलती हैं, इसलिए शुरुआत में ही बड़ा और मजबूत गमला चुनना जरूरी है. इसके लिए मिट्टी का बड़ा गमला या मजबूत फैब्रिक ग्रो बैग बेहतर माना जाता है. अगर प्लास्टिक का गमला इस्तेमाल करें, तो उसकी क्वालिटी अच्छी होनी चाहिए ताकि तेज धूप में खराब न हो. साथ ही नीचे ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके.

पौधे के लिए तैयार करें पोषण से भरपूर मिट्टी
शहतूत के पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए मिट्टी तैयार करना सबसे अहम कदम माना जाता है. इसके लिए सामान्य बगीचे की मिट्टी में थोड़ी बालू मिट्टी मिलाई जाती है, ताकि पानी जमा न हो. इसके बाद मिट्टी में ट्राइकोडर्मा पाउडर मिलाया जाता है. यह ऑर्गेनिक फंगीसाइड मिट्टी में मौजूद हानिकारक फंगस को खत्म करने में मदद करता है और जड़ों को सड़ने से बचाता है. दो बड़े गमलों के हिसाब से मिट्टी में डेढ़ किलो वर्मीकम्पोस्ट, 30 ग्राम कैल्शियम पाउडर, 20 ग्राम नीम खली और 20 ग्राम सीवीड ग्रेन्यूल्स मिलाने चाहिए. इससे पौधे को लगातार पोषण मिलता है और उसकी ग्रोथ तेजी से होती है.

जिप्सम बनाता है मिट्टी को ज्यादा असरदार
मिट्टी तैयार करते समय 200 ग्राम जिप्सम मिलाना बेहद जरूरी माना जाता है. जिप्सम मिट्टी के पीएच लेवल को संतुलित रखता है, जिससे पौधा सभी जरूरी पोषक तत्व आसानी से सोख पाता है. यही वजह है कि सही सॉइल मिक्स तैयार होने पर पौधा कम समय में घना और मजबूत बन जाता है.



पौधा लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान
नर्सरी से लाए गए ब्लैक शहतूत के पौधे को प्लास्टिक थैली से सावधानी से निकालना चाहिए. ध्यान रहे कि उसकी मुख्य जड़ को नुकसान न पहुंचे.
पौधे को गमले के बीचों-बीच सीधा रखें और चारों तरफ तैयार मिट्टी भर दें. इसके बाद मिट्टी को हाथों से दबाकर टाइट करें, ताकि जड़ों के पास हवा न रह जाए. आखिर में भरपूर पानी दें.
शुरुआती एक महीने तक पौधे को भारी खाद देने की जरूरत नहीं होती. महीने में दो बार हल्का फंगीसाइड पानी में मिलाकर जड़ों में डालना काफी होता है. समय-समय पर हल्की छंटाई करना भी जरूरी है. इससे पौधा चारों तरफ से घना होता है और उसमें ज्यादा मात्रा में मीठे शहतूत के फल लगते हैं.

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