2 घंटे...120 पन्ने...और बन गया वर्ल्ड रिकॉर्ड; रांची की बेटी ने हिंदी लेखन से दुनिया को किया हैरान

रांची की जानी-मानी हिंदी लेखिका डॉ. मेघा रानी ने अपनी असाधारण लेखन क्षमता से एक नया इतिहास रच दिया है. उन्होंने बिना रुके सिर्फ दो घंटे में 120 मौलिक हस्तलिखित पन्ने लिखकर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया. इस उपलब्धि के साथ वह दुनिया की सबसे तेज गति से हिंदी लिखने वाली महिला बन गई हैं.

Ranchi Author Dr Megha Rani
gnttv.com
  • रांची,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST
  • रांची की बेटी ने 120 मिनट में 120 लिखकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया
  • अपन झारखंड के नाम से बुक भी होगी प्रकाशित

रांची की बेटी और हिंदी लेखिका डॉ. मेघा रानी ने अपनी लेखनी के दम पर झारखंड का नाम दुनिया भर में रोशन किया है. उन्होंने सिर्फ 120 मिनट में 120 मौलिक हस्तलिखित पन्ने लिखकर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. इस उपलब्धि को 2 जुलाई को बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने आधिकारिक मान्यता दी. इसके साथ ही वह सबसे तेज गति से हिंदी में मौलिक लेखन करने वाली महिला बन गई हैं.

इस रिकॉर्ड की सबसे खास बात यह है कि डॉ. मेघा ने जो 120 पन्ने लिखे, उनमें झारखंड के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और विरासत को जगह दी. अब यही पांडुलिपि 'अपन झारखंड' नाम की किताब के रूप में जल्द प्रकाशित होगी, ताकि लोग राज्य की समृद्ध पहचान को पढ़ और समझ सकें.

जनवरी में शुरू हुई तैयारी मई में हुआ रिकॉर्ड अटेम्प्ट
इस रिकॉर्ड की प्रक्रिया इसी साल जनवरी में जयपुर से शुरू हुई थी. मई में दुनिया के अलग-अलग देशों के जजों की मौजूदगी में ऑनलाइन लाइव वर्ल्ड रिकॉर्ड अटेम्प्ट कराया गया. रिकॉर्डिंग, दस्तावेज और सभी सबूतों की जांच के बाद बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने इस उपलब्धि को मंजूरी दी. अब इस रिकॉर्ड को लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी भेजा गया है.

सात साल से कर रही हैं लेखन, पहले भी बना चुकी हैं रिकॉर्ड
डॉ. मेघा रानी पिछले सात साल से नारी विमर्श और सामाजिक मुद्दों पर लगातार लिख रही हैं. उनकी पुस्तक 'श्रीकृष्ण लीला' को पहले ही इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिल चुकी है. इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार समेत कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

यह उपलब्धि हिंदी और झारखंड को समर्पित
डॉ. मेघा रानी का कहना है कि यह उपलब्धि उनकी मातृभाषा हिंदी और जन्मभूमि झारखंड को समर्पित है. उनका सपना है कि उनकी यह सफलता राज्य की बेटियों और युवाओं को अपने सपनों के लिए मेहनत करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दे. उनका मानना है कि अगर इरादे मजबूत हों तो छोटे शहर से भी दुनिया तक अपनी पहचान बनाई जा सकती है.

-आकाश कुमार की रिपोर्ट

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