BJP Strategy for the UP Elections 2027
BJP Strategy for the UP Elections 2027
उत्तर प्रदेश (UP) में साल 2027 में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) होने हैं. इस चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) अभी से जुट गई है. साल 2025 में बिहार और 2026 में बंगाल चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद बीजेपी के चुनावी रणनीतिकारों और मशीनरी का पूरा अमला 2027 में यूपी में चुनावी जीत की हैट्रिक लगवाने के लिए प्रदेश में पहुंच चुका है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में दौरा पर दौर कर रहे हैं. सीएम योगी का कहना है कि 2027 में फिर से यूपी में भाजपा का परचम फहरेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी अब पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश पर लगा दिए हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 4 और 5 जुलाई को दो दिन के संगठनात्मक दौरे पर लखनऊ आ रहे हैं. वह इस दौरान पार्टी के अलग-अलग स्तर के पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें करेंगे. इन बैठकों में संगठन की आगे की कार्ययोजना, आने वाले कार्यक्रमों और विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा होगी.
बीजेपी का फोकस मिशन 57 लोटस पर
बीजेपी का इस समय पूरा फोकस मिशन 57 लोटस पर है. आपको मालूम हो कि यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में बीजेपी को 312 सीटों पर जीत मिली थी. 2022 के चुनाव में 255 सीटों पर विजय मिली थी, जो 2017 के मुकाबले 57 सीटें कम थीं. इस बार बीजेपी इन 57 सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए विशेष ध्यान दे रही है. मिशन 57 लोटस का मुख्य लक्ष्य हारी हुई 57 सीटों पर दोबारा कमल खिलाना है. भारतीय जनता पार्टी ने इसे विजयपथ प्लान नाम दिया है.
भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य हारी इन 57 सीटों को हर हाल में जीतना है. इसके लिए सामाजिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे और संगठनात्मक मजबूती पर एक साथ काम होगा. आपको मालूम हो कि यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में भारतीय जनता पार्टी को पश्चिम से पूर्वांचल तक 18 जिलों में हार का सामना करना पड़ा था. इनमें कई जिले ऐसे थे, जहां लोकसभा चुनाव 2024 में भी बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा. इस हार की समीक्षा के बाद अब अयोध्या, आजमगढ़, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडलों को विशेष फोकस एरिया बनाया गया है. भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि इन मंडलों के कमजोर बूथों पर ही 2027 की जीत का रास्ता तय होगा.
हारी सीटों पर विधानसभावार प्रभारी किए जाएंगे नियुक्त
प्रदेश भाजपा संगठन की नई टीम के गठन के बाद बीजेपी चुनावी तैयारियों को धार देने में जुट गई है. बीजेपी हारी सीटों पर विशेष ध्यान दे रही है. पार्टी का कहना है कि हारी हुई सीटों पर विधानसभावार प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे. ये प्रभारी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में जाकर जिला, मंडल और बूथ स्तर तक के संगठन, मुद्दों और मतदान की रणनीति के बारे में फीडबैक जुटाएंगे. जरूरत के मुताबिक संगठन को मजबूत बनाने की कार्रवाई भी कराएंगे. उधर, क्षेत्रीय पदाधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने क्षेत्र की हारी हुई सीटों को जीत सुनिश्चित करने को लेकर जनता के बीच अपनी मौजूदगी बनाए रखें और उनके मुद्दों को सुलझाएं. कमजोर माने जा रहे विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रीय और राज्य स्तरीय नेताओं का प्रवास कराया जाएगा.
लगातार तीसरी बार सीएम बनने की तैयारी में योगी
आपको मालूम हो कि लोकसभा चुनाव 2024 में यूपी की कुल 80 लोकसभा सीटों में से बीजेपी को सिर्फ 33 सीटों पर जीत मिली थी. इस चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) 37 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही थी. इसके पहले लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को 62 सीटों पर जीत मिली थी. सपा सिर्फ 5 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी थी. लोकसभा चुनाव 2024 में सीटों के नुकसान के बाद बीजेपी ने विधानसभा वार समीक्षा कर केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट भेजी थी. इस रिपोर्ट में सामने आया था कि ओबीसी वोट बैंक का खिसकना और पीडीए-संविधान नैरेटिव से पार्टी को कम सीटें मिली थी.
इसी के चलते अब भारतीय जनता पार्टी जातीय समीकरणों का नया गणित तैयार कर रही है और अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की काट तलाशने में जुट गई है. बीजेपी यूपी में अपना प्रदेश अध्यक्ष को बदल चुकी है. विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए सीएम योगी की सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया. कुल मिलाकर जातीय समीकरण साधे जा चुके हैं. लगातार तीसरी बार सीएम बनने की तैयारी कर रहे योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और समाजवादी पार्टी से बगावत कर आए मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया है. हंसराज विश्वकर्मा, कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत और सुरेंद्र दिलेर को राज्य मंत्री बनाया गया है. अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है. आपको मालूम हो कि भूपेंद्र चौधरी, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी समुदाय से आते हैं. उधर, सोमेंद्र तोमर प्रभावशाली समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. अजीत सिंह पाल पाल समाज से आते हैं. मनोज पांडेय ब्राह्मण समाज से आते हैं.