देश 26 जनवरी 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. 1950 में इसी तारीख को भारत देश का संविधान लागू हुआ था और भारत लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक देश बना था. साथ ही इस दिन देश की राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ, झांकियों के माध्यम से देश के इतिहास, संस्कृति, विरासत और उपलब्धियों का प्रदर्शन किया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर परेड के लिए झांकियों को सिलेक्ट कैसे किया जाता है? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं.
कौन चुनता है झांकियां
दरअसल, गणतंत्र दिवस के आयोजनों की जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय के पास होती है. इसके लिए रक्षा मंत्रालय, राज्यों, मंत्रालयों और सरकारी उपक्रमों से झांकी के आवेदन मांगता है. परेड के लिए झांकियों का चयन लगभग छह महीने पहले शुरू हो जाता है. गणतंत्र दिवस पर निकलने वाली परेड में शामिल होने वाली झांकियां भी एक खास थीम पर आधारित होती हैं. साथ ही झांकियों के सिलेक्शन के लिए एक लंबी और पारदर्शी प्रक्रिया होती है. इस प्रक्रिया में थीम से लेकर डिजाइन और प्रस्तुति तक हर पहलू को बारीकी से परखा जाता है. इस साल 2026 में झांकियों के लिए थीम 'स्वावलम्बन का मंत्र- वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत’ है.
कैसे सिलेक्ट होती है परेड के लिए झांकी
आमतौर पर इसकी तैयारी सितम्बर से शुरू होती है. कई बार इसकी प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू होती है. झांकियों को चुनने के लिए रक्षा मंत्रालय सेलेक्शन कमेटी बनाता है. इस कमेट में अलग-अलग क्षेत्र जैसे म्यूजिक, आर्किटेक्चर, पेंटिंग, कोरियाग्राफी और स्कल्पचर के विशेषज्ञ होते हैं. यह समिति प्रस्तावों को थीम के साथ वापस भेजती है और संबंधित राज्य को थीम आधारित झांकी का स्केच और ब्लूप्रिंट भेजने को कहती है. निर्धारित समय के अंदर राज्यों को स्केच और ब्लूप्रिंट भेजने होते हैं.
3D मॉडल चेकिंग
सबसे पहले झांकियों के स्केच और ब्लूप्रिंट आवेदकों से झांकी का 3डी मॉडल भेजने को कहा जाता है. जिसमें देखा जाता है कि मॉडल में जो झांकी दिखाई गई है, वह देखने में कितनी आकर्षक और प्रभावशाली लग रही है. 3D मॉडल फाइनल होने के बाद संबंधित राज्य झांकी बनाने का काम शुरू करते हैं. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, झांकी का सिलेक्शन कई मानकों पर निर्भर करता है. जैसे- वो दिखने में कैसी है, लोगों पर कितना असर डालेगी, उसमें किस तरह का संगीत इस्तेमाल हुआ है, विषय को ध्यान में रखते हुए इसे बनाया गया है वो कितना गहराई के साथ दिखाया जा रहा है.
इन बातों का रखा जाता है खास ध्यान
रक्षा मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार, दो राज्यों की झांकी एक तरह की नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा एक ही तरह की लिखावट या डिजाइन नहीं होनी चाहिए. राज्य का नाम हिन्दी या अंग्रेजी में होना चाहिए. गाइडलाइन में इको फ्रेंडली मैटेरियल का इस्तेमाल करने को प्राथमिकता दी जाती है. इसके अलावा मंत्रालय की तरफ से झांकी के लिए ट्रैक्टर और ट्रेलर उपलब्ध कराया जाता है. इन सभी प्रक्रिया के बाद झांकियों को परेड के दिन कर्तव्य पथ पर निकाला जाता है.
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