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महिला के अंतिम संस्कार पर बुलाई गई पंचायत, जानें क्या था पूरा मामला

उत्तर प्रदेश में सहारनपुर के एक गांव में एक बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार को लेकर बखेड़ा खड़ा हो गया. गांववालों ने श्मशान में महिला का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया. इसके बाद पंचायत बुलाई गई. उसके बाद अंतिम संस्कार किया गया.

Saharanpur News
gnttv.com
  • सहारनपुर,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

उत्तर प्रदेश में सहारनपुर के एक गांव में एक महिला के अंतिम संस्कार को विवाद खड़ा हो गया. पंचायत बुलाई गई. उसके बाद फैसला हुआ कि महिला की चिता को आग दी जाएगी. ये वाक्या पिंकी गांव का है, जहां एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई. इस महिला की फैमिली ने ईसाई धर्म अपना लिया था. इसी को लेकर पूरा विवाद हुआ.

अंतिम संस्कार पर बखेड़ा-
पिंकी गांव की रहने वाले  रामसिंह की पत्नी मामचंदी का निधन हो गया. परिवार के लोगों ने अंतिम संस्कार के लिए शव को श्मशान घाट ले जाने लगे. तभी बखेड़ा खड़ा हो गया. रास्ते में कुछ लोगों ने इसपर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि जिन परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया है, वे गांव के श्मशान घाट का इस्तेमाल नहीं कर सकते और उन्हें अपने धर्म के रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करना चाहिए. इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया.

अंतिम संस्कार के लिए बुलाई गई पंचायत-
जब काफी देर तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो गांव में पंचायत बुलाई गई. गांव के मंदिर में पंचायत बुलाई गई, जहां बिरादरी के लोगों ने सामूहिक रूप से चर्चा की. पंचायत में यह मुद्दा उठा कि गांव के कुल 13 परिवार पहले ईसाई धर्म अपना चुके हैं. पंचायत के दौरान 11 परिवारों ने वापस अपने मूल धर्म में लौटने की सहमति जताई. इसके बाद फैसला लिया गया कि मामचंदी का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में ही कराया जाएगा. मृतक के बेटे सुरेंद्र ने बताया कि गांव के जिम्मेदार लोगों और बिरादरी के बीच सहमति बनने के बाद अब अंतिम संस्कार गांव में ही संपन्न होगा.

लालच में अपनाया था ईसाई धर्म- ग्रामीण
ग्रामीण शीशराम ने बताया कि पहले कुछ लोग लालच या बहकावे में आकर ईसाई धर्म में चले गए थे, लेकिन अब 11 परिवारों ने शपथ पत्र देकर वापसी की है. गांव में पहले से एक समिति बनाई गई थी, जो ऐसे परिवारों को समझाने का काम कर रही थी. उनका कहना है कि दो परिवार अभी शेष हैं, जिनसे भी बातचीत जारी है. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि वे सहमत नहीं होते हैं तो सामाजिक स्तर पर लिए गए निर्णय आगे भी लागू रहेंगे.

गांव के लोगों का दावा है कि धर्म परिवर्तन के मामलों को लेकर उन्होंने संगठित रूप से पहल की है. समिति के सदस्यों का कहना है कि वे लोगों को समझाकर अपने समाज में शामिल कर रहे हैं. फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन इस घटना ने सामाजिक और धार्मिक मुद्दों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है. प्रशासन की ओर से भी हालात पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने.

(राहुल कुमार की रिपोर्ट)

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