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Sparrow conservation: राजगढ़ में गोरैया को बचाने के लिए ऐसी सराहनीय पहल, विलुप्त होने की कगार पर है यह चिड़िया 

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में विलुप्त होती गोरैया चिड़िया को बचाने के लिए एक सराहनीय पहल शुरू की गई है. एक स्थानीय समाजसेवी संस्था ने भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए गोरैया के लिए 5000 से अधिक विशेष घोंसले तैयार किए हैं और बांटने का फैसला किया है. 

Sparrow Conservation
gnttv.com
  • राजगढ़,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:56 PM IST

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में गोरैया संरक्षण के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है. इस पहल के तहत 5000 से ज्यादा घोंसले तैयार किए गए हैं, जिन्हें पूरे जिले में बांटा जा रहा है. गर्मी के मौसम में गोरैया को राहत देने के उद्देश्य से यह घोंसले प्लाइवुड से बनाए गए हैं. इन घोंसलों में गोरैया तीन-चार महीने तक आराम से रह सकती है.

गोरैया की घटती संख्या पर चिंता
पिछले कुछ वर्षों में गोरैया की संख्या में तेजी से कमी आई है. पहले यह छोटी सी चिड़िया हर आंगन में नजर आती थी, लेकिन अब यह विलुप्त होने की कगार पर है. टॉवरों, इलेक्ट्रिक उपकरणों और बड़े निर्माण कार्यों के कारण गोरैया का प्राकृतिक आवास समाप्त हो रहा है. इस पहल के माध्यम से गोरैया को बचाने और प्रकृति को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है.

महाकाल मंदिर से प्रेरणा
इस मुहिम में महाकाल मंदिर की भी भूमिका रही है. घोंसले बांटने वाली संस्था ने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री को एक घोंसला देकर इस पहल के बारे में जानकारी दी. इन घोंसलों में बाबा महाकाल का रक्षा सूत्र भी बांधा गया है, जो गोरैया को हर विपदा से बचाने का प्रतीक है. संस्था के सदस्यों का मानना है कि यह प्रयास बाबा महाकाल और माता लक्ष्मी की प्रेरणा से संभव हुआ है.

जागरूकता अभियान
घोंसलों के वितरण के साथ ही लोगों को गोरैया के संरक्षण के लिए जागरूक किया जा रहा है. इस मुहिम से जुड़े लोगों का कहना है कि इस प्रयास का असर अगले साल तक दिखेगा, जब गोरैया फिर से लोगों के घरों में चहचहाती नजर आएगी. यह छोटी सी कोशिश वक्त के साथ एक बड़े नतीजे का पैगाम लेकर आएगी.

गर्मी में गोरैया को राहत
गर्मी का मौसम गोरैया के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. इसी वजह से गर्मी की शुरुआत से पहले इन घोंसलों का वितरण किया जा रहा है. संस्था ने 10 दिनों के भीतर सभी घोंसलों को बांटने का लक्ष्य रखा है ताकि गोरैया को समय पर अपना आशियाना मिल सके.

राजगढ़ से उम्मीद की किरण
राजगढ़ में शुरू की गई यह पहल न केवल गोरैया को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह प्रकृति के संरक्षण के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है. इस मुहिम से जुड़े लोगों का मानना है कि गोरैया बचेगी तो प्रकृति बचेगी. 

(पंकज शर्मा की रिपोर्ट) 


 

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