भारतीय मिडिल क्लास अपनी मेहनत और नौकरीपेशा जिंदगी के लिए जाना जाता है. लाखों लोग हर दिन घंटों काम करते हैं ताकि परिवार को बेहतर भविष्य दे सकें. अच्छी सैलरी होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में लोग आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बन पाते. इसकी सबसे बड़ी वजह कम कमाई नहीं, बल्कि पैसों को सही तरीके से मैनेज न कर पाना मानी जाती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमीर और मिडिल क्लास के बीच असली फर्क इनकम नहीं, बल्कि पैसों को संभालने की सोच और आदतों का होता है.
दिखावे की लाइफस्टाइल
आज के दौर में महंगा मोबाइल, लग्जरी कार और ब्रांडेड लाइफस्टाइल लोगों की पसंद बन गई है. सोशल मीडिया पर अमीर दिखने की होड़ में कई लोग जरूरत से ज्यादा खर्च करने लगते हैं. कई बार लोग ऐसी चीजें खरीदने के लिए पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड ईएमआई का सहारा लेते हैं जिनकी कीमत समय के साथ घटती जाती है.
जल्दी अमीर बनने के चक्कर में बढ़ रहा जोखिम
कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाहत में कई लोग पेनी स्टॉक्स में बड़ी रकम लगा देते हैं. कम कीमत देखकर उन्हें लगता है कि थोड़ा सा बढ़ने पर भारी मुनाफा मिलेगा. लेकिन असलियत में ऐसे शेयरों में जोखिम काफी ज्यादा होता है. कई कंपनियों पर भारी कर्ज होता है और उनका बिजनेस भी कमजोर रहता है. ऐसे में निवेशकों का पैसा फंस सकता है.
सिर्फ एफडी पर भरोसा करना गलत
आज भी बड़ी संख्या में लोग अपनी बचत का ज्यादातर हिस्सा सेविंग अकाउंट या एफडी में रखते हैं. उन्हें लगता है कि पैसा सुरक्षित है, लेकिन महंगाई धीरे-धीरे उनकी बचत की असली ताकत कम कर देती है. अगर एफडी का रिटर्न महंगाई से कम है, तो लंबे समय में पैसा बढ़ने के बजाय कमजोर होता जाता है. इसी वजह से म्यूचुअल फंड, एसआईपी और इंडेक्स फंड जैसे विकल्प बेहतर माने जाते हैं क्योंकि इनमें कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है.
इमरजेंसी फंड और दूसरी इनकम है जरूरी
मिडिल क्लास परिवारों की सबसे बड़ी कमजोरी यह होती है कि उनका पूरा बजट एक सैलरी पर निर्भर रहता है. नौकरी जाने या मेडिकल इमरजेंसी आने पर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है. इसलिए विशेषज्ञ कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखने की सलाह देते हैं. साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस, टर्म इंश्योरेंस और पैसिव इनकम के स्रोत भविष्य को सुरक्षित बनाने में मदद करते हैं.
फाइनेंशियल नॉलेज ही असली ताकत
बहुत से लोग गाड़ी और गहनों पर लाखों रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन अपने वित्तीय नोलेज को बढ़ाने पर ध्यान नहीं देते. बाजार, निवेश और टैक्स के नियम लगातार बदलते रहते हैं. ऐसे में जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, वह आर्थिक रूप से पीछे छूट सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ पैसा कमाना काफी नहीं है, बल्कि उसे सही जगह इस्तेमाल करना और बढ़ाना सीखना ही असली समझदारी है.