शराब कम करनी है? ये आसान तरीका सच में काम करता है, स्टडी में हुआ खुलासा

ऑस्ट्रेलिया के The George Institute for Global Health की शोधकर्ता सिमोन पेटीग्रू और उनकी टीम यह समझना चाहती थी कि लोगों को शराब कम करने के लिए किस तरह का मैसेज सबसे ज्यादा असर करता है.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:15 AM IST
  • शराब कम करने की तकनीक
  • ये आसान तरीका सच में काम करता है

कई लोग तय तो करते हैं कि अब शराब कम पीएंगे, लेकिन दोस्तों की पार्टी या वीकेंड आते-आते जाम पर जाम झलकाते हैं. अगर आप या आपके आसपास कोई शराब कम करना चाहता है, तो वैज्ञानिकों ने ऐसे लोगों के लिए दो आसान उपाय बताए हैं. पहला है शराब से कैंसर का खतरा बताना और हर ड्रिंक की गिनती रखना. यह अध्ययन 2021 में जर्नल Addictive Behaviors में प्रकाशित हुआ था.

क्या था रिसर्च का मकसद?
ऑस्ट्रेलिया के The George Institute for Global Health की शोधकर्ता सिमोन पेटीग्रू और उनकी टीम यह समझना चाहती थी कि लोगों को शराब कम करने के लिए किस तरह का मैसेज सबसे ज्यादा असर करता है.

सिमोन पेटीग्रू का कहना है, 'सिर्फ यह बता देना कि शराब कैंसर का कारण बनती है, काफी नहीं है. लोगों को यह भी बताना जरूरी है कि वे जोखिम कम करने के लिए क्या कदम उठा सकते हैं.'

कैसे किया गया अध्ययन?
इस रिसर्च में करीब 8,000 लोगों ने हिस्सा लिया. पहले सर्वे में 7,995 लोगों ने जवाब दिया. तीन हफ्ते बाद 4,588 लोग दूसरे सर्वे में शामिल हुए और फिर तीन हफ्ते बाद 2,687 लोगों ने आखिरी सर्वे पूरा किया.

प्रतिभागियों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया और उन्हें शराब से जुड़े अलग-अलग विज्ञापन और संदेश दिखाए गए. कुछ को सिर्फ हेल्थ रिस्क बताए गए, कुछ को व्यवहार बदलने के तरीके सुझाए गए.

कौन-सा तरीका सबसे ज्यादा असरदार रहा?
सबसे ज्यादा असर उस संयोजन का दिखा, जिसमें टीवी विज्ञापन के जरिए शराब और कैंसर के बीच संबंध बताया गया और साथ ही लोगों को सलाह दी गई कि वे अपने हर पैग की गिनती रखें.

यह वही ग्रुप था जिसमें छह हफ्तों के दौरान शराब की मात्रा में वास्तविक और महत्वपूर्ण कमी देखी गई.

क्यों जरूरी है यह जानकारी?
शोधकर्ताओं के अनुसार, कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि शराब भी कैंसर का कारण बन सकती है. ज्यादा शराब पीने से न सिर्फ कैंसर, बल्कि दिल की बीमारी, पाचन संबंधी दिक्कतें, डिमेंशिया और समय से पहले मौत का खतरा भी बढ़ता है. World Health Organization के अनुसार, दुनियाभर में समय से पहले होने वाली मौतों में करीब 7 प्रतिशत के लिए शराब जिम्मेदार हो सकती है.

क्या सिर्फ गिनती रखने से फर्क पड़ेगा?
रिसर्च बताती है कि जब लोग हर ड्रिंक को गिनते हैं, तो उन्हें अंदाजा होता है कि वे वास्तव में कितना पी रहे हैं. कई बार बस एक और कहते-कहते मात्रा ज्यादा हो जाती है. गिनती रखने से जागरूकता बढ़ती है और कंट्रोल करना आसान होता है. हालांकि, शोधकर्ता यह भी मानते हैं कि यह तरीका हर व्यक्ति पर समान रूप से काम करे, यह जरूरी नहीं, लेकिन जो लोग शराब कम करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक आसान और अच्छी शुरुआत हो सकती है.

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