गर्मी के मौसम में दही शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ डाइजेशन को भी बेहतर बनाने में भी मदद करता है. ठंडी और ताजी दही खाने में जितनी टेस्टी लगती है, उतनी ही सेहत के लिए फायदेमंद भी होती है. लेकिन गर्मी के कारण दही जल्दी खट्टा हो जाता है. इससे सवाल उठता है कि क्या खट्टा दही खाना सही है या नहीं.
खट्टा दही खाने के नुकसान
दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स डाइजेशन सिस्टम के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन जब दही बहुत ज्यादा खट्टा हो जाता है तो इसके फायदे कम होने लगते हैं. खट्टा दही खाने से गैस, एसिडिटी और सीने में जलन जैसी परेशानियां हो सकती हैं. कुछ लोगों को इससे दांतों में सेंसिटिविटी या दर्द भी महसूस हो सकता है. इसलिए बेहतर यही है कि बहुत ज्यादा खट्टा दही सीधे खाने से बचें और इसकी जगह ताजा दही खाया जाए.
बासी दही खाने के नुकसान
दही को ताजा ही खाना सबसे अच्छा माना जाता है. आमतौर पर 1–2 दिन पुराना दही सीमित मात्रा में खाया जा सकता है, लेकिन इससे ज्यादा पुराना दही हेल्थ के लिए जोखिम भरा हो सकता है. अधिक समय तक रखा हुआ दही खराब होने लगता है और उसमें फफूंद या अमोनिया जैसी गंध आने लगती है. ऐसा दही खाने से पेट में इंफेक्शन, सूजन और फूड प्वाइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए हमेशा दही की क्वालिटी और ताजगी का ध्यान रखना जरूरी है.
खट्टे दही का सही इस्तेमाल
अगर दही हल्का खट्टा हो गया है, तो उसे फेंकने की जरूरत नहीं है. ऐसे दही का उपयोग छाछ, कढ़ी या अन्य डिश में किया जा सकता है. इससे न केवल भोजन का स्वाद बढ़ता है बल्कि दही का सही इस्तेमाल भी हो जाता है.
ऐसे नहीं होगा दही खट्टा
गर्मी में दही को सही तरीके से जमाना बेहद जरूरी है. मिट्टी के बर्तन में दही जमाने से यह ठंडा रहता है और ज्यादा खट्टा नहीं होता. दही जमने के बाद यदि उसमें पानी आ जाए तो उसे निकाल देना चाहिए, क्योंकि यही पानी खटास बढ़ाता है. साथ ही, दही जमने के तुरंत बाद उसे फ्रिज में रख देना चाहिए ताकि खटास बढ़ने से रोका जा सके.