आज के समय में कपल्स की लाइफस्टाइल तेजी से बदल रही है. किसी की डाइट फिटनेस के हिसाब से है, तो कोई अपनी पसंद का खाना पसंद करता है. किसी का ऑफिस टाइम अलग है, तो किसी को देर रात खाना अच्छा लगता है. ऐसे में एक ही घर में रहने वाले कई कपल्स अब अलग-अलग खाना खरीदने, बनाने और खाने लगे हैं. इसी नए चलन को ‘Food Divorce’ कहा जा रहा है. इसका मतलब रिश्ता या शादी खत्म होना बिल्कुल नहीं है.
फूड डायवोर्स का आसान मतलब है कि कपल्स एक साथ रहते हुए भी अपनी-अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से खाना खाते हैं. दोनों अलग सामान खरीद सकते हैं, अलग खाना बना सकते हैं और अलग समय पर खाना खा सकते हैं. इसकी एक बड़ी वजह अलग डाइट, अलग खाने की पसंद और बिजी रूटीन है.
खाना सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं है. यह हमारी बचपन की आदतों, परिवार और इमोशंस से भी जुड़ा होता है. इसलिए जब पार्टनर की खाने की पसंद अलग होती है, तो छोटी बात भी बहस में बदल सकती है. कई बार एक व्यक्ति को लगता है कि उसकी पसंद को महत्व नहीं मिल रहा, जबकि दूसरा खुद को जज या कंट्रोल किए जाने जैसा महसूस कर सकता है.
हर बार ऐसा नहीं होता. अगर दोनों के ऑफिस का समय अलग है, किसी को खास डाइट की जरूरत है या दोनों की पसंद बिल्कुल अलग है, तो अलग-अलग खाना एक आसान रास्ता हो सकता है. हर दिन एक ही खाना खाने की मजबूरी रिश्ते के लिए जरूरी नहीं है.
समस्या तब हो सकती है जब अलग-अलग खाने के साथ कपल्स का साथ बिताया समय भी कम होने लगे. अगर डिनर के साथ बातचीत बंद हो जाए या कोई पार्टनर जानबूझकर साथ बैठने से बचने लगे, तो यह रिश्ते में इमोश्नल दूरी बढ़ने का इशारा हो सकता है.
अलग खाना खाने के बावजूद रिश्ते में अपनापन बनाए रखा जा सकता है. कपल्स सुबह साथ चाय पी सकते हैं, वीकेंड पर मिलकर खाना बना सकते हैं या कभी-कभी बाहर साथ खाना खा सकते हैं. डिनर के बाद साथ टहलना और एक-दूसरे की पसंद का सम्मान करना भी मददगार हो सकता है.