सोने और चांदी की आसमान छूती कीमतों ने इस समय आम लोगों की खरीदारी की आदतों को पूरी तरह बदल दिया है. शादी से लेकर त्योहारों तक, जहां कभी भारी गोल्ड ज्वेलरी पहली पसंद हुआ करती थी, वहीं अब लोग ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जो दिखने में रॉयल हो लेकिन बजट पर भारी न पड़ें. हाल ही में प्रधानमंत्री की ओर से भी लोगों से जरूरत के अनुसार सोना खरीदने और पारंपरिक भारतीय हस्तकलाओं को बढ़ावा देने की अपील की गई. ऐसे माहौल में राजस्थान की 400 साल पुरानी थेवा कला एक बार फिर सुर्खियों में है. कम सोने, शानदार कारीगरी और शाही लुक वाली यह कला अब महंगे गहनों का सबसे खूबसूरत और किफायती विकल्प बनती जा रही है.
अब थेवा कला सिर्फ पारंपरिक डिजाइन्स तक सीमित नहीं
राजस्थान के Pratapgarh की विश्वविख्यात Thewa Art अब सिर्फ विरासत तक सीमित नहीं रही, बल्कि आधुनिक फैशन इंडस्ट्री में भी तेजी से अपनी जगह बना रही है. खासतौर पर Jaipur में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है. जयपुर की मशहूर सोनकांच ज्वेलर्स की थेवा ज्वेलरी डिजाइनर Vinita Malviya बताती हैं कि पहले थेवा कला में ज्यादातर स्क्वायर और रेक्टैंगल शेप्स ही देखने को मिलती थीं, लेकिन अब इसमें आधुनिक और डिजाइनर पैटर्न का बड़ा बदलाव आया है. आज थेवा ज्वेलरी में अलग-अलग शेप्स, कट्स और एक्सपेरिमेंटल डिजाइन्स देखने को मिल रहे हैं, जिनमें सेंटर होल वाले नेकपीस, डिजाइनर लेयर्स, स्टोन स्टडिंग और फ्यूजन आर्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि आजकल लड़कियों में पतली चेन वाले थेवा पेंडेंट्स काफी ट्रेंड में हैं, जबकि रानी हार स्टाइल के बड़े नेकलेस रॉयल लुक देने के कारण ब्राइडल फैशन का हिस्सा बन रहे हैं. खास बात यह है कि अब थेवा कला सिर्फ पारंपरिक डिजाइन्स तक सीमित नहीं रही. इसमें बनी ठनी, नेचर थीम, राजस्थानी लोक आकृतियां और मिनिएचर आर्ट जैसी डिजाइन्स को भी शामिल किया जा रहा है. कई पीसेज ऐसे तैयार किए जा रहे हैं जिनमें राजस्थान की अलग-अलग कलाओं की झलक एक ही ज्वेलरी सेट में दिखाई देती है. मीनाकारी, पारंपरिक राजस्थानी मोटिफ्स और रंगीन कांच का मेल इसे और ज्यादा खास बना रहा है.
...तो इस कारण कीमत रहती है कम
थेवा कला की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें सोने की मात्रा बेहद कम होती है. रंगीन कांच पर 23 कैरेट सोने की पतली शीट से हाथों से महीन जालीदार डिजाइन तैयार किए जाते हैं और बेस में चांदी का इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि इसका लुक पूरी तरह रॉयल और गोल्डन होने के बावजूद इसकी कीमत भारी गोल्ड ज्वेलरी की तुलना में काफी कम रहती है. Vinita Malviya के अनुसार थेवा ज्वेलरी की अगर कोई हैवी रानी हार या पूरा ब्राइडल सेट खरीदता है, तो वह लगभग 2 से 3 लाख रुपए तक में तैयार हो जाता है. खास बात यह है कि इस कीमत में सिर से लेकर गले, कान और हाथों तक की पूरी ज्वेलरी शामिल हो सकती है, जबकि आज के समय में इतने बजट में भारी गोल्ड ब्राइडल सेट मिलना बेहद मुश्किल हो गया है.
देवलिया स्टेट से शुरू हुई थेवा कला
थेवा ज्वेलरी सिर्फ खूबसूरत ही नहीं बल्कि स्किन फ्रेंडली भी मानी जाती है. ऊपर की परत में गोल्ड वर्क होने की वजह से यह एंटी-एलर्जिक होती है और लंबे समय तक पहनने पर भी त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाती. हालांकि इसकी देखभाल बेहद जरूरी होती है. विनीता मालवीय बताती हैं कि थेवा ज्वेलरी को हमेशा नमी, पानी और परफ्यूम से दूर रखना चाहिए. इसे एयरटाइट कंटेनर या पॉलीथिन पैक में स्टोर करने से इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है और कांच व गोल्ड वर्क खराब नहीं होता. करीब 400 साल पहले देवलिया स्टेट से शुरू हुई थेवा कला कभी राजघरानों और विदेशी मेहमानों के लिए खास उपहार के रूप में बनाई जाती थी. माना जाता है कि इसकी शुरुआत Nathu Ji Soni ने की थी. समय के साथ यह कला राजस्थानी शाही संस्कृति की पहचान बन गई. आज जब सोने के दाम लगातार रिकॉर्ड बना रहे हैं, तब यही थेवा कला आम लोगों के लिए एक ऐसा विकल्प बनकर सामने आ रही है जिसमें परंपरा भी है, फैशन भी, रॉयल्टी भी और बजट की राहत भी. राजस्थान की यह सदियों पुरानी कला अब सिर्फ विरासत नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की बदलती ज्वेलरी पसंद की नई पहचान बनती जा रही है.