सावन का महीना आते ही लोग भगवान शिव की भक्ति के साथ खानपान में भी बड़े बदलाव करने लगते हैं. इस दौरान ज्यादातर लोग सात्विक भोजन करते हैं और प्याज-लहसुन से लेकर कई दूसरी चीजों से भी परहेज करते हैं. लोग इसे केवल धार्मिक परंपरा मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान की नजर से देखें तो इसके पीछे कई स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हैं. बारिश के मौसम में पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है और कई खाद्य पदार्थ शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए सावन में लोग इन 5 शाकाहारी चीजों से दूरी बनाना बेहतर समझते हैं.
साग
पालक, मेथी, सरसों, बथुआ और चौलाई जैसी हरे-हरे साग सावन में कम खाने की सलाह दी जाती है. बारिश के मौसम में इनमें कीड़े, बैक्टीरिया और फंगस पनपने का खतरा बढ़ जाता है. कई बार अच्छी तरह धोने के बाद भी सूक्ष्म जीव रह जाते हैं, जो पेट के संक्रमण, दस्त और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं. आयुर्वेद भी इस मौसम में इन्हें सीमित मात्रा में खाने की सलाह देता है.
मशरूम
मशरूम भले ही पौष्टिक माना जाता हो, लेकिन बरसात के मौसम में यह जल्दी खराब हो सकता है. इसकी खेती भी नमी वाले वातावरण में होती है, जहां फंगस और बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. अगर मशरूम ताजा न हो या सही तरीके से स्टोर न किया गया हो, तो इसे खाने से पेट दर्द, उल्टी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
बैंगन
सावन में बैंगन खाने से भी कई लोग बचते हैं. वैज्ञानिक रूप से देखें तो बारिश के मौसम में बैंगन में कीड़े लगने की संभावना अधिक रहती है. इसके अलावा कुछ लोगों में बैंगन एलर्जी या एसिडिटी की समस्या बढ़ा सकता है. आयुर्वेद के अनुसार यह वात बढ़ाने वाला भोजन माना जाता है, इसलिए इस मौसम में इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए.
फूलगोभी और पत्ता गोभी
बरसात के दौरान गोभी की फसल में छोटे कीड़े और लार्वा आसानी से पनप जाते हैं. कई बार अच्छी तरह साफ करने के बावजूद ये पूरी तरह नहीं निकलते. ऐसे में इनका सेवन पेट के संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है. यदि खाना ही हो तो इन्हें गर्म पानी में अच्छी तरह साफ करके और अच्छी तरह पकाकर ही खाएं.
ज्यादा तली-भुनी और मसालेदार सब्जियां
सावन में पाचन शक्ति सामान्य दिनों की तुलना में कमजोर मानी जाती है. ऐसे में अधिक तेल, मसाले और तला हुआ भोजन गैस, एसिडिटी, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है. यही वजह है कि इस मौसम में हल्का, ताजा और कम मसाले वाला भोजन खाने की सलाह दी जाती है.
आखिर सावन में सात्विक भोजन क्यों माना जाता है बेहतर?
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं. वहीं शरीर का पाचन तंत्र भी थोड़ा धीमा हो जाता है. इसलिए ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है. यही कारण है कि सावन में मौसमी फल, दही (यदि स्वास्थ्य अनुकूल हो), दूध, सूखे मेवे, लौकी, तोरी, कद्दू, परवल और मूंग दाल जैसी चीजों को लोग खाना पसंद करते हैं.
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