पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. भारत में भी इसी कारण एलपीजी सिलेंडर की कीमत और उपलब्धता को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ी है.
सरकार का कहना है कि घरेलू एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन कुछ जगहों पर सप्लाई में देरी और अनियमितता की शिकायतें सामने आ रही हैं. ऐसे में कई परिवार अब यह सोचने लगे हैं कि खाना पकाने के लिए इंडक्शन कुकटॉप ज्यादा किफायती विकल्प हो सकता है या नहीं.
LPG और इंडक्शन कुकटॉप में खर्च का अंतर
एक सामान्य घरेलू एलपीजी सिलेंडर में लगभग 14.2 किलोग्राम गैस होती है और इसकी कीमत करीब 950 रुपए के आसपास होती है. हालांकि गैस चूल्हे पर खाना बनाते समय काफी ऊर्जा गर्मी के रूप में नष्ट हो जाती है.
वहीं इंडक्शन कुकटॉप बिजली की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा सीधे खाना पकाने में इस्तेमाल करता है, इसलिए इसे ज्यादा ऊर्जा-कुशल माना जाता है. कई अध्ययनों के अनुसार अगर बिजली का टैरिफ बहुत ज्यादा नहीं है, तो इंडक्शन पर खाना बनाना गैस की तुलना में सस्ता साबित हो सकता है.
LPG को क्यों मिलती है प्राथमिकता
हालांकि इंडक्शन कुकटॉप खर्च के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है, लेकिन भारत के कई हिस्सों में लोग अब भी एलपीजी को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह बिजली कटौती है. जब बिजली नहीं होती, तब गैस चूल्हा ही सबसे आसान विकल्प रहता है. इसके अलावा भारतीय खाना बनाने के कई पारंपरिक तरीके जैसे रोटी सेंकना, तड़का लगाना या तेज आंच पर पकाना गैस चूल्हे पर ज्यादा आसान और सुविधाजनक माना जाता है.
इंडक्शन अपनाने में शुरुआती खर्च ज्यादा
इंडक्शन कुकटॉप इस्तेमाल करने के लिए विशेष प्रकार के बर्तनों की जरूरत होती है. भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले कई पारंपरिक बर्तन इंडक्शन पर काम नहीं करते. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को इंडक्शन अपनाने के लिए नए बर्तन खरीदने पड़ सकते हैं, जिससे शुरुआती खर्च बढ़ जाता है. यही कारण है कि संभावित बचत के बावजूद कई परिवार अभी भी एलपीजी सिलेंडर को ही प्राथमिकता देते हैं.