फ्लैट लिया है किराए पर, लेकिन टपक रहा नल.. ऐसे में कौन कराएगा मरम्मत, किराएदार या मकान मालिक

जो लोग किराए पर रहते हैं, उन्हें अच्छी तरह पता है कि मकान की मरम्मत को लेकर कितना विवाद होता है. मकान मालिक का कहना होता है कि पैसा किराएदार देगा, जबकि किराएदार का कहना होता है कि मकान मालिक मरम्मत करवाए. ऐसे में इस बात को साफ करने के लिए कि कौन किस के लिए जिम्मेदार है, एक फ्रेमवार तैयार है.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 19 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:57 PM IST

किराए के मकान में रह रहे लोगों के सामने अक्सर ऐसी स्थिति आ जाती है जब नल टपकने लगता है, दीवारों में दरारें पड़ जाती हैं या कोई मरम्मत की जरूरत महसूस होती है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि मरम्मत का खर्च और जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी. मकान मालिक की या किराएदार की? इस संबंध में भारत का मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 साफ तौर पर दिशा-निर्देश दिए गए है. प्रदान करता है.

मकान मालिक की क्या जिम्मेदारियां हैं?

मॉडल टेनेंसी एक्ट के अनुसार, मकान मालिक और किराएदार दोनों की जिम्मेदारी है कि वे प्रॉपर्टी को उसी स्थिति में बनाए रखें जैसी वह किराए पर सौंपने से पहले थी. लेकिन इस्तेमाल होने के दौरान होने वाली टूट-फूट को इसमें शामिल नहीं किया जाता.

कानून के तहत कुछ खास तरह की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है. अगर मकान मालिक जरूरी मरम्मत कराने से इनकार करता है या उसे टालता है, तो किराएदार खुद मरम्मत करवा सकता है. इसके बाद वह उस खर्च को आने वाले महीनों के किराए से एडजस्ट कर सकता है. लेकिन किसी भी महीने में यह कटौती तय मंथली किराए के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती.

लेकिन अगर मरम्मत न होने के कारण मकान रहने लायक नहीं रह जाता, तो किराएदार 15 दिन का लिखित नोटिस देकर मकान खाली करने का अधिकार रखता है.

किराएदार को भी निभानी हैं जिम्मेदारियां

किराएदार को केवल किराया नहीं चुकाना होता. उसे प्रॉपर्टी, फिटिंग्स और अन्य सुविधाओं का रखरखाव करना होता है. कानून के अनुसार किराएदार जानबूझकर या लापरवाही से किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा सकता.

यदि मकान में कोई नुकसान होता है, तो उसकी जानकारी लिखित रूप में मकान मालिक को देना जरूरी है. साथ ही, किराएदार को इस बात का ध्यान रखना है कि प्रॉपर्टी रहने रहने लायक स्थिति में बनी रहे.

अगर किराएदार अपनी जिम्मेदारी वाली मरम्मत नहीं कराता या बिना अनुमति कोई कंस्ट्रक्शन कर देता है, तो मकान मालिक खुद मरम्मत का काम रोक सकता है. इसका खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट से काटा जा सकता है. यदि खर्च जमा राशि से अधिक हो, तो किराएदार को नोटिस मिलने के एक महीने के भीतर बकाया राशि का भुगतान करना होगा.

नेचुरल डिजास्टर की स्थिति में क्या होगा?

बाढ़, आग या अन्य प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों को फोर्स मेज्योर माना जाता है. यदि ऐसी घटनाओं के कारण मकान रहने योग्य नहीं रह जाता, तो मकान मालिक उस अवधि के लिए किराया नहीं वसूल सकता जब तक संपत्ति दोबारा रहने योग्य न बन जाए.

यदि मकान को दोबारा रहने योग्य बनाना संभव नहीं है, तो मकान मालिक को नोटिस अवधि समाप्त होने के 15 दिनों के भीतर सिक्योरिटी डिपॉजिट और एडवांस किराया वापस करना होगा. 

 

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