अक्सर आपने नोट किया होगा कि कार का ओडोमीटर टॉप स्पीड 200 kmph दिखाता है, लेकिन कार उस स्पीड तक पहुंचती ही नहीं है. अब ऐसे में सवाल है कि जब कार ने उस टॉप स्पीड तक जाना ही नहीं, तो इतनी बड़ा नंबर लिखा क्यों जाता है?
दरअसल इसकी एक वजह है कि कार कंपनी हर मॉडल के लिए अलग से स्पीडोमीटर तैयार नहीं करती है. वह कई बार एक ही मॉडल के स्पीडोमीटर को अलग-अलग कार में इस्तेमाल करती हैं. इसका फायदा होता है कि कंपनी का खर्च बचता है. वह खर्च जो उसे हर नए मॉडल की कार के लिए तैयार करने में लगाना पड़ता.
किसी भी कार की असली टॉप स्पीड उसके इंजन पावर, वजन, टायर और दूसरी चीजों पर डिपेंड करती है. इसलिए मीटर पर 200 kmph लिखे होने का मतलब यह नहीं है कि कार सही में 200 की रफ्तार से उड़ेगी.
किसी छोटी कार की असली टॉप स्पीड 150 या 160 हो सकती है, लेकिन उसके मीटर की आखिरी सीमा 240 तक हो सकती है. यह एक आम बात है.
कार कंपनी एक ही कार के कई वर्जन बाजार में लाती है. इनमें कुछ मॉडल कम पावर वाले होते हैं और कुछ ज्यादा पावर वाले. अगर हर वर्जन के लिए अलग स्पीडोमीटर बनाया जाए तो कंपनी का खर्च बढ़ेगा. इसलिए कई बार एक ही डिजाइन का स्पीडोमीटर अलग-अलग वर्जन में लगाया जाता है.
स्पीडोमीटर पर 200 या 220 तक की स्पीड देखकर कार ज्यादा पावरफुल लग सकती है. इसका कार की बिक्री पर भी असर पड़ सकता है. लेकिन मीटर पर बड़ा नंबर होना कार की असली ताकत का सबूत नहीं है.