कभी खाना खाते समय तो कभी अचानक बैठे-बैठे हिचकी आने लगती है. कई बार यह कुछ मिनट में अपने आप बंद हो जाती है, लेकिन कभी-कभी लगातार हिचकी आने से परेशानी होने लगती है. आपने भी कभी न कभी सोचा होगा कि आखिर हिचकी क्यों आती है? क्या इसका संबंध पेट से है या सांस लेने की प्रक्रिया से?
दरअसल, हिचकी आने के पीछे शरीर में होने वाली एक खास प्रक्रिया जिम्मेदार होती है. इसमें डायफ्राम और कुछ खास नसों की भूमिका होती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि हिचकी क्यों आती है और इसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं.
आखिर हिचकी क्यों आती है?
हमारे फेफड़ों के नीचे एक मांसपेशी होती है, जिसे डायफ्राम कहते हैं. यह सांस लेने में मदद करती है. जब डायफ्राम अचानक सिकुड़ने लगता है, तो शरीर में तेजी से हवा अंदर जाती है. इसी दौरान गले में मौजूद वोकल कॉर्ड अचानक बंद हो जाते हैं. इससे 'हिक' जैसी आवाज निकलती है. इसी आवाज को हम हिचकी कहते हैं.
हिचकी आने में कौन सी नसें होती हैं जिम्मेदार?
हिचकी आने की प्रक्रिया में वेगस नर्व और फ्रेनिक नर्व की अहम भूमिका होती है. ये नसें दिमाग और डायफ्राम के बीच संदेश पहुंचाने का काम करती हैं. जब इन नसों में किसी वजह से परेशानी या जलन होती है, तो डायफ्राम अचानक सिकुड़ सकता है. इसी कारण हिचकी शुरू हो जाती है.
इन वजहों से भी आ सकती है हिचकी
हिचकी आने के कई सामान्य कारण हो सकते हैं. बहुत जल्दी खाना खाना, जरूरत से ज्यादा भोजन करना और मसालेदार खाना खाना इसकी वजह बन सकता है. इसके अलावा सोडा या दूसरे गैस वाले ड्रिंक पीने, अचानक बहुत गर्म या ठंडी चीज खाने और ज्यादा हवा निगलने से भी हिचकी आ सकती है. कई बार घबराहट, डर, उत्साह और तनाव के कारण भी हिचकी शुरू हो जाती है.
हिचकी रोकने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके