आजकल छोटे बच्चों में दांतों में कैविटी की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है. पहले जहां यह परेशानी छोटी उम्र में कम देखने को मिलती थी, वहीं अब कई बच्चे शुरुआती उम्र में ही दांत दर्द और सड़न जैसी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. ज्यादा मीठा खाना, सही तरीके से ब्रश न करना और मुंह की सफाई का ध्यान न रखना इसकी सबसे बड़ी वजहों में शामिल है. कई माता-पिता शुरुआत में इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर आगे चलकर यह गंभीर परेशानी बन सकती है.
जब बच्चे ज्यादा मीठी चीजें खाते हैं, तो मुंह में मौजूद बैक्टीरिया शुगर के संपर्क में आकर एसिड बनाते हैं. यही एसिड धीरे-धीरे दांतों की ऊपरी परत यानी एनामेल को नुकसान पहुंचाने लगता है. अगर लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे, तो दांतों में छोटे-छोटे छेद बनने लगते हैं और दर्द शुरू हो सकता है. खासतौर पर बार-बार चॉकलेट, कैंडी और मीठे ड्रिंक्स लेने वाले बच्चों में कैविटी का खतरा ज्यादा होता है.
सही तरीके से ब्रश करना है बेहद जरूरी
बच्चों के दांतों को स्वस्थ रखने के लिए उन्हें रोज कम से कम दो बार ब्रश कराना जरूरी माना जाता है. डॉक्टर फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट के इस्तेमाल की सलाह देते हैं, क्योंकि यह दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है. छोटे बच्चों के लिए बहुत ज्यादा टूथपेस्ट लगाने की जरूरत नहीं होती. अगर बच्चे की उम्र 3 साल से कम है तो चावल के दाने जितना टूथपेस्ट काफी माना जाता है, जबकि बड़े बच्चों के लिए मटर के दाने जितनी मात्रा सही रहती है.
ज्यादा मीठी चीजें बढ़ा सकती हैं खतरा
चॉकलेट, टॉफी, कैंडी, कोल्ड ड्रिंक और पैक्ड जूस बच्चों के दांतों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. खासकर चिपचिपी मिठाइयां दांतों पर लंबे समय तक चिपकी रहती हैं, जिससे बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. अगर बच्चे बार-बार स्नैकिंग करते हैं, तो भी कैविटी का खतरा बढ़ सकता है. बेहतर होगा कि बच्चों को ताजे फल, दही, पनीर और हेल्दी स्नैक्स खाने की आदत डालें.
डेंटिस्ट से नियमित जांच भी है जरूरी
बच्चे के पहले दांत आने के बाद या एक साल की उम्र तक एक बार डेंटिस्ट को जरूर दिखाना चाहिए. कई बार शुरुआत में कैविटी का दर्द महसूस नहीं होता, लेकिन नियमित जांच से इसे समय रहते पकड़ा जा सकता है.
अगर बच्चे ब्रश करने से बचते हैं, हर समय मीठा खाते रहते हैं या अंगूठा चूसने की आदत रखते हैं, तो भविष्य में दांतों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसलिए शुरुआत से ही बच्चों में अच्छी ओरल हाइजीन की आदत डालना बेहद जरूरी है. सही देखभाल और थोड़ी सावधानी से बच्चों के दांत लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत बनाए जा सकते हैं.