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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में जुटे हैं राजस्थान के हुनरमंद हाथ, सिरोही जिले में तराशी जा रही है शिलाएं

gnttv.com
  • अयोध्या,
  • 29 मई 2023,
  • Updated 8:20 PM IST
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राजस्थान के सिरोही जिले ने राम लला के साथ अपना अटूट रिश्ता जोड़ लिया है. देश-दुनिया के रामभक्त जब अयोध्या में अपने आराध्य के दर्शन के लिए पहुचेंगे तो वहां मंदिर की शिलाओं पर उकेरी गई नायाब नक्काशी को सराहने से नहीं रह पाएंगे. सिरोही के पिण्डवाडा और आबूरोड के मंदिर निर्माण से जुड़े 3 कारखानों में अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर में लगने वाले पत्थरों को तराशा जा रहा है. पिछले 2 सालो से अब तक यहां से तकरीबन 3 लाख घनफुट पत्थर तराश कर अयोध्या भेजा जा चुका है.  

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स्टोन कार्विंग के लिए दुनिया भर में अपनी कलाकारी के लिए मशहूर सिरोही के पिंडवाड़ा में राम शिला पूजन के साथ राम मंदिर के पत्थरों को तराशने का काम शुरू हो गया था. मंदिर के ग्राउंड फ्लोर से लगाकर टॉप फ्लोर तक गर्भगृह से लगाकर शिखर तक, पिलर, सीलिंग, बीम, झरोखे और जालियों की शिलाओं को तरशाने का काम युद्धस्तर पर जारी है. 
 

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यहां पिंडवाड़ा से रोजाना तराशे गए पत्थरों को ट्रकों में लादकर अयोध्या भेजा जा रहा है. मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों की मानें तो साल के आखिर तक निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर मंदिर निर्माण से जुड़ा काम पूरा कर लिया जाएगा. मातेश्वरी टेम्पल कंष्ट्रकशन, पिण्डवाडा के सी.एन.सी.डिजाइनर अल्केश लोहार ने बताया कि उनकी कंपनी ने मन्दिर निर्माण से जुड़े काम को सितम्बर 2021 में चालू किया था और लोअर फ्लोर, ग्राउंड फ्लोर, पहला और दूसरा फ्लोर का पूरा काम उनकी कंपनी ही कर रही है. 

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लोहार ने बताया की बंशी पहाडपुर से सेंड स्टोन को यहां तराशा जाता है. जिसमें बारीक काम को कारीगरों द्वारा हथोड़ी, छेनी और कुछ पत्थरों को सीएनसी मशीनों से तराशा जाता है. औसतन 7 से 8 सौ घनफुट पत्थर प्रतिदिन तराशे जा रहे हैं. उसके बाद उसे ट्रकों में लादकर अयोध्या भेजा जाता है.

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सिरोही जिले के पिंडवाड़ा कस्बे की पत्थर तराशी की दुनिया कायल है और नब्बे के दशक में जब अयोध्या में राम मंदिर कार्यशाला बनी थी उस वक्त पत्थरों को पिंडवाड़ा से तराश कर ले जाया गया था. 

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मातेश्वरी टेम्पल कंष्ट्रकशन पिण्डवाडा के ओनर नरेश मालवीय ने बताया कि उस वक्त वो 17 साल के थे और स्कूलिंग के बाद वे अपने पिताजी के साथ मिलकर इस काम को सीख रहे थे. नरेश मालवीय आगे कहते हैं कि 25-27 साल का लम्बा वक्त गुजर गया है. उस दौरान चंपत राय अयोध्या कार्यशाला का काम संभालते थे. और हर हफ्ते यहां आते थे और वर्कशॉप में रहकर पूरा काम देखते थे. काम का पूरा लेखा-झोका उनके हाथ से ही होता था. 

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नरेश मालवीय ने बताया कि अभी जो काम चल रहा है उसे हम तीन वेंडर्स मिलकर कर रहे हैं. इनमें उनकी मातेश्वरी टेम्पल कंट्रैक्शन, सोमपुरा मार्बल, पिंडवाड़ा और मालवीय क्राफ्ट आबू रोड शामिल है. तीनों वर्कशॉप से अब तक 210 ट्रक पत्थर तराश कर अयोध्या भेजे जा चुके हैं. मालवीय ने बताया कि अब तक के किए काम से गर्भग्रह का निर्माण हो चुका है. पहले मंजिल का काम भी हो चुका है. नरेश मालवीय ने बताया कि श्रीराम उनके आराध्य हैं. इसलिए हमने काम को बहुत लगन से किया है. यही नहीं राम मंदिर के काम के लिए कुशल से कुशल कारीगरों को नियुक्त किया है. 

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मंदिर निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है. और राम भक्तों को इसके उद्घाटन का बेसब्री से इंतजार है. अनुमान है कि 2024 में राम मंदिर निर्माण पूरा कर लिया जाएगा और उसके साथ ही देश दुनिया के राम भक्त अयोध्या में अपने आराध्य के दर्शन का लाभ ले सकेंगे. (रिपोर्ट-राहुल त्रिपाठी)