रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है. यह धागा भाई-बहन के प्यार, भरोसे और एक-दूसरे की रक्षा की भावना का प्रतीक माना जाता है. इसलिए त्योहार खत्म होने के बाद राखी को उतारने और रखने को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं हैं. आम तौर पर राखी को तुरंत उतारने के बजाय कुछ दिन कलाई पर रखने की परंपरा बताई गई है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार राखी को करीब 3 से 7 दिन तक कलाई पर रखा जा सकता है. कुछ लोग इसे जन्माष्टमी तक भी बांधे रखते हैं और पूजा के बाद उतारते हैं. हालांकि, राखी उतारने के लिए कोई एक तय नियम नहीं है. अपने परिवार की परंपरा के अनुसार राखी रखने का फैसला किया जा सकता है.
राखी उतारते समय जल्दबाजी न करें. भगवान का स्मरण करके इसे धीरे से कलाई से निकालना बेहतर माना जाता है. राखी को जोर से खींचकर तोड़ने या काटने से बचें. उतारने के बाद इसे किसी साफ कपड़े या थाली में रखें. धार्मिक मान्यता में राखी को सामान्य कचरे के साथ फेंकना सही नहीं माना जाता.
अगर राखी सूती या प्राकृतिक धागे से बनी है, तो उसे साफ बहते पानी में फूलों के साथ प्रवाहित करने की परंपरा है. इसे घर के बगीचे या साफ मिट्टी में दबाना भी एक विकल्प माना जाता है. कुछ लोग राखी को पूजा सामग्री के साथ भी रखते हैं. हालांकि प्लास्टिक वाली राखी को पानी में डालने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पानी गंदा हो सकता है.
अगर राखी में सोना, चांदी या कोई कीमती धातु लगी है, तो उसे विसर्जित करने की जरूरत नहीं है. ऐसी राखी को साफ करके सुरक्षित जगह पर रखा जा सकता है. भविष्य में इसे याद के तौर पर भी संभालकर रखा जा सकता है.
कलाई पर बंधी राखी अगर अचानक खुल जाए या टूट जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसे जरूरी नहीं कि कोई अशुभ संकेत माना जाए. टूटे हुए धागे को सम्मान से उठाकर साफ जगह रखें.