अरावली की पहाड़ियों के बीच करणी माता के मंदिर में नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मेले की शुरुआत हो गई है. प्रदेश सरकार के वन मंत्री संजय शर्मा ने विधिवत पूजा अर्चना करके मेले का उद्घाटन किया. इस दौरान मंत्री ने यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं से कहा कि अनावश्यक जंगल में जाने का प्रयास न करें. बाघिन st2302 अपने दो शावकों के साथ इसी क्षेत्र में घूम रही है. केवल निर्धारित रास्ते से ही मंदिर पहुंचे. ऐसे में टाइगर के डर के साए में अरावली की वादियों के बीच करणी माता का मेला रविवार से शुरू हुआ. इस मेले में देश भर से लाखों श्रद्धालु आते हैं.
200 साल पहले बना था माता का मंदिर-
अलवर अरावली की वादियों से घिरा हुआ है. अलवर के बाला किला क्षेत्र में करणी माता का मंदिर है. इस मंदिर का निर्माण अलवर रियासत के महाराज बख्तावर सिंह ने 1792 से 1815 के बीच अपनी मन्नत पूरी होने पर करवाया था. बख्तावर सिंह को श्राप और फिर तबीयत खराब होने के बाद उन्होंने करणी माता की उपासना की. जिससे उनको राहत मिली. उसके बाद उन्होंने मंदिर का निर्माण करवाया.
9 दिन लगता है मेला-
यहां करणी माता त्रिशूल धारण किए स्वरूप में विराजमान हैं. नवरात्रि के मौके पर यहां 9 दिन मेला भरता है. राजस्थान के अलावा हरियाणा, मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश सहित आसपास के राज्य से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं.
आस्था का प्रमुख केंद्र है मंदिर- मंत्री
नवरात्र के शुभारंभ पर वन मंत्री संजय शर्मा ने करणी माता मंदिर पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और विधिवत आरती में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की. वन मंत्री ने प्रदेशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुखी और समृद्ध जीवन की कामना की. वन मंत्री ने कहा कि पहाड़ों के बीच स्थित करणी माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. नवरात्र के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता रानी के दर्शन करने पहुंचते हैं. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि मंदिर और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र को स्वच्छ बनाए रखें तथा पॉलिथीन का उपयोग करने से बचें.
डर के साए में माता के दर्शन-
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में ST-2302 बाघिन अपने दो शावकों के साथ विचरण कर रही है. ऐसे में वन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित किए गए रास्तों का ही उपयोग करें. श्रद्धालु और आमजन जंगल के प्रतिबंधित या अन्य क्षेत्रों में जाने से बचें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके. वन मंत्री ने सभी श्रद्धालुओं से धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से धार्मिक स्थलों की पवित्रता और प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखा जा सकता है.
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