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Ashadha Gupt Navratri 2026: कब से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि? जानें सही तिथि, घटस्थापना मुहूर्त और लिख लें पूजा के दिनों की पूरी डेट

गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तंत्र साधना और दस महाविद्याओं की उपासना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. सामान्य श्रद्धालु भी इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, व्रत और मंत्र जाप करके देवी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं. जानें पूजा और घट स्थापना का शुभ मुहूर्त.

Gupt Navratri 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:10 AM IST

चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह आषाढ़ शुक्ल पक्ष में आने वाली गुप्त नवरात्रि का भी विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की गुप्त साधना की जाती है. मान्यता है कि इन नौ दिनों में विधि-विधान से देवी की आराधना करने पर साधक को विशेष सिद्धि, शक्ति और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है. साल 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक रहेगी.

कब से शुरू हो रही गुप्त नवरात्रि?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 15 जुलाई 2026, बुधवार से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी. इसका समापन 23 जुलाई 2026, गुरुवार को नवमी पारण के साथ होगा. हालांकि देवी के नौ स्वरूपों की पूजा 15 से 22 जुलाई तक की जाएगी, जबकि 23 जुलाई को व्रत का पारण किया जाएगा.

किस दिन होगी देवी के किस रूप की पूजा?
तारीख    दिन    देवी का स्वरूप
15 जुलाई    बुधवार    मां शैलपुत्री
16 जुलाई    गुरुवार    मां ब्रह्मचारिणी
17 जुलाई    शुक्रवार    मां चंद्रघंटा और मां कूष्मांडा (तृतीया तिथि के कारण दोनों पूजन)
18 जुलाई    शनिवार    मां स्कंदमाता
19 जुलाई    रविवार    मां कात्यायनी
20 जुलाई    सोमवार    मां कालरात्रि
21 जुलाई    मंगलवार    महाअष्टमी, मां महागौरी
22 जुलाई    बुधवार    मां सिद्धिदात्री, संधि पूजा
23 जुलाई    गुरुवार    नवरात्रि पारण

घट स्थापना का मुहूर्त
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पहले दिन 15 जुलाई 2026 को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:15 बजे से 10:43 बजे तक रहेगा. इस दौरान कलश स्थापना करना सबसे शुभ माना गया है. प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर 3:12 बजे शुरू होगी और 15 जुलाई को सुबह 11:50 बजे समाप्त होगी.

घट स्थापना की विधि
सबसे पहले घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह साफ-सफाई करें.
एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
मिट्टी के पात्र में जौ बोएं.
तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरें और उसमें सुपारी, अक्षत, दूर्वा, सिक्का तथा गंगाजल डालें.
कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर स्थापित करें.
कलश को जौ वाले पात्र के ऊपर रखें.
इसके बाद मां दुर्गा का आह्वान करें, दीप जलाएं, रोली, अक्षत, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें.
अंत में दुर्गा सप्तशती, देवी कवच या अपनी श्रद्धा अनुसार मंत्रों का जाप कर पूजा संपन्न करें.


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