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अयोध्या में बनेगा यूनिक म्यूजियम, दान कर सकते हैं श्रीराम से जुड़ी पांडुलिपियां

अयोध्या में भगवान श्रीराम से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों का एक यूनिक म्यूजियम बनने जा रहा है. इस पहल के तहत प्रधानमंत्री म्यूजियम एंड लाइब्रेरी ने लोगों से भगवान राम से जुड़ी पांडुलिपि दान करने की अपील की है. अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह बताते हैं कि देशभर में साधु-संतों, मठों, विश्वविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों के पास राम से जुड़ी कई दुर्लभ पांडुलिपियां मौजूद हैं.

Ayodhya Ram Temple
मनीष चौरसिया
  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:30 PM IST

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जल्द ही भगवान श्रीराम से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों का एक अनोखा संग्रहालय बनने जा रहा है. इस संग्रहालय के लिए राम मंदिर के पास ही जमीन का आवंटन कर दिया गया है. खास बात यह है कि देशभर से श्रीराम से संबंधित पांडुलिपियों को इकट्ठा करने का अभियान भी शुरू कर दिया गया है.

अयोध्या में बनेगा अनोखा संग्रहालय-
इस पहल के तहत प्रधानमंत्री म्यूजियम एंड लाइब्रेरी ने देश के लोगों से अपील की है कि अगर उनके पास किसी भी भाषा या लिपि में भगवान राम से जुड़ी कोई भी पांडुलिपि मौजूद है, तो वे उसे संग्रहालय के लिए दान कर सकते हैं. इन पांडुलिपियों को अयोध्या में बनने वाले संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा और प्रदर्शित किया जाएगा.

कई साधु-संतों के पास हैं दुर्लभ पांडुलिपियां- डॉ. संजीव
अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह बताते हैं कि देशभर में साधु-संतों, मठों, विश्वविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों के पास राम से जुड़ी कई दुर्लभ पांडुलिपियां मौजूद हैं. लेकिन कई बार लोग इन्हें देने से हिचकते हैं, क्योंकि यह उनके लिए गौरव और आस्था का विषय होती हैं.
डॉ. सिंह एक दिलचस्प उदाहरण भी देते हैं. वे बताते हैं कि एक महंत ने अपने शिष्यों से कहा था कि उनकी मृत्यु के बाद उनके पास मौजूद पांडुलिपियों को उनकी समाधि में ही दबा दिया जाए. उनका कहना था कि ऐसी कई पांडुलिपियां लोगों के पास सुरक्षित तो हैं, लेकिन उनका उपयोग या संरक्षण नहीं हो पा रहा है.

80 से ज्यादा लोगों ने किया संपर्क- डॉ. संजीव
उन्होंने बताया कि इस अभियान को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है. अब तक देश के कोने कोने से 80 से ज़्यादा लोग उनसे संपर्क कर चुके हैं. इनमें कई ऐसे भारतीय भी शामिल हैं, जो अब विदेश में रहते हैं, लेकिन उनके पास श्रीराम से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियां हैं.

7D तकनीक से तैयार होगा संग्रहालय-
अयोध्या में बनने वाला यह संग्रहालय आधुनिक 7D तकनीक के आधार पर तैयार किया जाएगा, जिससे आने वाले लोग भगवान राम की कथा और उससे जुड़ी परंपराओं को एक नए और रोचक अनुभव के साथ देख सकेंगे.

डॉ. संजीव कुमार सिंह के अनुसार, जो भी व्यक्ति अपनी पांडुलिपि संग्रहालय को देगा, उसका नाम भी वहां दर्ज किया जाएगा. यानी दानदाताओं को पूरा श्रेय दिया जाएगा, ताकि उनकी इस सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में भूमिका हमेशा याद रखी जा सके.

यह संग्रहालय न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करेगा, बल्कि दुनिया भर के लोगों को राम कथा की समृद्ध परंपरा से भी परिचित कराएगा.

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