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रामलला के धाम में जगमगाएंगे 1 लाख 1 हजार दीप, दसवें दीपोत्सव पर मिट्टी के दीयों से सजेगा अयोध्या का भव्य राम मंदिर

श्रीरामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद इस उत्सव की भव्यता को विशेष स्वरूप देने की तैयारी है. मंदिर परिसर में दीप प्रज्ज्वलन से लेकर विभिन्न मंदिरों और परकोटों की सजावट तक, हर व्यवस्था को आकर्षक बनाने की योजना है. मिट्टी के दीपों की लौ और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था मिलकर रामलला के धाम को अनुपम आभा प्रदान करेगी.

10th Deepotsav Celebrating Shri Ram mandir
मयंक शुक्ला
  • अयोध्या,
  • 26 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:43 AM IST

दसवें दीपोत्सव-2026 को भव्य और यादगार बनाने के लिए अयोध्या में तैयारियां तेज हो गई हैं. इस बार श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में 1 लाख 1 हजार मिट्टी के दीपक प्रज्वलित करने की विशेष तैयारी है. पारंपरिक दीपों की सुनहरी आभा के साथ आधुनिक रोशनी मंदिर परिसर की दिव्यता को और निखारेगी. आयोजन में धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति, स्वदेशी परंपरा और स्थानीय कारीगरों की भागीदारी का अनूठा संगम देखने को मिलेगा.

रामनगरी के लिए दीपोत्सव केवल रोशनी का उत्सव नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा, सांस्कृतिक गौरव और परंपराओं के पुनर्स्मरण का अवसर भी है. श्री रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद इस उत्सव की भव्यता को विशेष स्वरूप देने की तैयारी है. मंदिर परिसर में दीप प्रज्ज्वलन से लेकर विभिन्न मंदिरों और परकोटों की सजावट तक, हर व्यवस्था को आकर्षक बनाने की योजना है. मिट्टी के दीपों की लौ और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था मिलकर रामलला के धाम को अनुपम आभा प्रदान करेगी.

रामलला के धाम में परंपरा और तकनीक का संगम
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर को भव्य स्वरूप देने के लिए दीप प्रज्ज्वलन के साथ आधुनिक लाइटों से भी सजावट की जाएगी. इस विशेष आयोजन में पारंपरिक मिट्टी के दीयों की रोशनी भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करेगी, जबकि आधुनिक प्रकाश व्यवस्था मंदिर की वास्तुकला और परिसर की भव्यता को उभारेगी. उद्देश्य है कि दीपोत्सव के अवसर पर रामलला का धाम श्रद्धा, सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण से आलोकित नजर आए.

राम मंदिर की धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने बताया कि श्रीरामलला ठाकुर जी के विराजमान होने के उत्सव को दिव्य और भव्य बनाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तथा धार्मिक समिति के सहयोग से विशेष सजावट की जाएगी. मंदिर परिसर में दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से उत्सव का धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण तैयार किया जाएगा.

मशीनों से नहीं, कुम्हारों के हाथों से आकार लेंगे 1 लाख 1 हजार दीप
इस आयोजन की सबसे खास बात दीपों के निर्माण की परंपरागत व्यवस्था है. मंदिर परिसर में प्रज्वलित किए जाने वाले 1 लाख 1 हजार दीपक मशीनों से तैयार करने के बजाय स्थानीय प्रजापति समाज के कुम्हारों के हाथों से बनवाने की योजना है. यानी रामलला के धाम को रोशन करने वाली हर लौ के पीछे मिट्टी को आकार देने वाले स्थानीय कारीगरों की मेहनत और हुनर भी शामिल होगा. राजकुमार दास के मुताबिक, धार्मिक समिति के महासचिव एवं अध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज के निर्णय के अनुसार पारंपरिक तरीके से दीपक तैयार कराने की योजना बनाई गई है. इस पहल से मिट्टी के दीपों की भारतीय परंपरा को प्रोत्साहन मिलने के साथ स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे.

यह पहल दीपोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसे स्थानीय कला, पारंपरिक शिल्प और स्वदेशी भावना से जोड़ती है. सदियों से भारतीय त्योहारों की पहचान रहे मिट्टी के दीये इस बार रामलला के धाम में परंपरा और आस्था का संदेश देंगे.

मुख्य मंदिर ही नहीं, पूरक मंदिरों और परकोटों तक सजेगा रामलला का धाम
दीपोत्सव की सजावट केवल मुख्य मंदिर तक सीमित नहीं रहेगी. मंदिर परिसर में स्थित पूरक मंदिरों, परकोटों और बाहरी क्षेत्र के देवालयों को भी आकर्षक ढंग से सजाने की तैयारी है. विभिन्न स्थानों पर दीप प्रज्ज्वलन, विशेष भोग और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से उत्सव की आध्यात्मिक छटा को विस्तार दिया जाएगा. वहीं, परिसर के अन्य हिस्सों में आधुनिक प्रकाश व्यवस्था की मदद से भव्यता बढ़ाई जाएगी. दीपों की पारंपरिक रोशनी और आधुनिक लाइटों का मेल पूरे मंदिर परिसर को उत्सवमय वातावरण प्रदान करेगा.



दसवें दीपोत्सव को यादगार बनाने की तैयारी
वर्ष 2026 का दसवां दीपोत्सव अयोध्या के लिए विशेष महत्व रखता है. आयोजन को भव्य बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां तेज हैं. दीपोत्सव के दौरान रामनगरी को आकर्षक स्वरूप देने की व्यापक तैयारियों के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर का विशेष सजावट कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बनने की उम्मीद है. राम मंदिर में 1 लाख 1 हजार दीपों का प्रस्तावित प्रज्ज्वलन भारतीय परंपरा, धार्मिक आस्था और स्थानीय कारीगरों के सम्मान को एक सूत्र में पिरोने की पहल है. मिट्टी के दीयों की लौ जब आधुनिक रोशनी के साथ रामलला के धाम को आलोकित करेगी, तब अयोध्या की आध्यात्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत दृश्य सामने आएगा.

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