15 कुंतल से ज्यादा फूलों से हो रही सजावट
15 कुंतल से ज्यादा फूलों से हो रही सजावट
कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में भक्ति और आस्था का खास नजारा देखने को मिल रहा है. भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंच रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर मंदिर को रंग-बिरंगे गेंदे के फूलों और हरी पत्तियों से सजाया जा रहा है. इस बार एक दानदाता के सहयोग से मंदिर को भव्य रूप दिया जा रहा है. मंदिर की सजावट में 15 कुंतल से अधिक फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है. फूलों से सजा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनने वाला है.
15 कुंतल से ज्यादा फूलों से हो रही सजावट
कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान बद्रीविशाल के मंदिर को खास तरीके से सजाने की तैयारी चल रही है. मंदिर के सिंहद्वार से लेकर दूसरे हिस्सों तक गेंदे के रंग-बिरंगे फूल लगाए जा रहे हैं. इसके साथ ही हरी पत्तियों से भी मंदिर की सजावट की जा रही है. इस काम में एक दानदाता सहयोग कर रहा है. सजावट का काम लगातार जारी है. इसके पूरा होने के बाद मंदिर का नजारा और भी आकर्षक हो जाएगा. पर्व के मौके पर मंदिर को सजाने की परंपरा श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखती है.
तप्त कुंड में स्नान के बाद दर्शन कर रहे श्रद्धालु
कार्तिक पूर्णिमा पर बदरीनाथ धाम में भगवान के दर्शन के साथ तप्त कुंड में स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि अलकनंदा नदी के किनारे स्थित तप्त कुंड में स्नान करने के बाद भगवान बद्रीविशाल के दर्शन करना पुण्यदायी होता है. इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही तप्त कुंड पहुंच रहे हैं. धाम में कड़ाके की ठंड और ठंडी हवाओं के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है. भक्त स्नान करने के बाद मंदिर में दर्शन कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं.
वीकेंड के चलते बढ़ी श्रद्धालुओं की चहल-पहल
कार्तिक पूर्णिमा और वीकेंड एक साथ पड़ने से बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है. देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंचकर पूजा-पाठ और दर्शन कर रहे हैं. हिंदू धर्म में कार्तिक मास को विशेष पुण्यकारी माना जाता है. इस दौरान स्नान, दान और भगवान के दर्शन का खास महत्व बताया गया है. आस्था, भक्ति और प्राकृतिक सुंदरता के बीच बदरीनाथ धाम का माहौल भक्तिमय बना हुआ है. मंदिर की फूलों से सजावट पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं को भगवान बद्रीविशाल के धाम का एक भव्य और मनमोहक रूप देखने को मिलेगा.
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