बगहा के रामनगर स्थित प्रसिद्ध नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में सावन की आखिरी सोमवारी पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही है. बिहार और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामनगर पहुंचे हैं. सावन की आखिरी सोमवारी के मौके पर मंदिर की रौनक और भी बढ़ गई है, लेकिन इस शिवालय की खासियत सिर्फ यहां उमड़ने वाली भीड़ नहीं, बल्कि इसका करीब डेढ़ सदी पुराना इतिहास भी है.
1879 में शुरू हुआ था मंदिर का निर्माण
रामनगर का नर्मदेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक विरासत के लिए भी खास माना जाता है. यह मंदिर रामनगर राज के प्रमुख शिवालयों में शामिल है. मंदिर की नींव सेनवंश के राजा प्रह्लाद सेन ने साल 1879 में रखवाई थी.
मंदिर के निर्माण में करीब छह साल का समय लगा और साल 1885 में इसका निर्माण पूरा हुआ. रामनगर राजमहल के ठीक सामने बना यह मंदिर आज भी राज परिवार के इतिहास और क्षेत्र की धार्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ है.
90 फीट लंबे चबूतरे पर बना है मंदिर
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण एक विशाल चबूतरे पर कराया गया है. इसकी लंबाई करीब 90 फीट और चौड़ाई 86 फीट बताई जाती है. मंदिर की बनावट और इसका राज परिवार से जुड़ा इतिहास इसे रामनगर की खास धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर बनाता है.
नर्मदा नदी से लाया गया था शिवलिंग
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित शिवलिंग को लेकर है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर में स्थापित शिवलिंग को मध्य प्रदेश की नर्मदा नदी से लाकर विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया था. नर्मदा नदी से शिवलिंग लाए जाने के कारण भगवान शिव के इस स्वरूप को नर्मदेश्वर महादेव कहा जाने लगा. इसी मान्यता के चलते श्रद्धालुओं के बीच यहां स्थापित शिवलिंग के प्रति विशेष आस्था है.
महारानी को सपने में हुए थे भगवान शिव के दर्शन
मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है. कहा जाता है कि राजा प्रह्लाद सेन की पत्नी महारानी विंध्यवासिनी देवी को सपने में भगवान शिव के दर्शन हुए थे. इसके बाद रामनगर में भगवान शिव के भव्य मंदिर के निर्माण की पहल हुई. हालांकि, सपने में भगवान शिव के दर्शन से जुड़ी यह कहानी स्थानीय धार्मिक मान्यता के तौर पर ही कही जाती है.
सावन की आखिरी सोमवारी पर खास रौनक
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर आज रामनगर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का अहम केंद्र है. सावन के पूरे महीने यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है और आखिरी सोमवारी पर यह भीड़ और बढ़ गई है. बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों के साथ उत्तर प्रदेश और पड़ोसी नेपाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान नर्मदेश्वर महादेव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर रहे हैं.
करीब डेढ़ सदी पुराना इतिहास, रामनगर राज परिवार से जुड़ी मंदिर की स्थापना और नर्मदा नदी से लाए गए शिवलिंग की मान्यता नर्मदेश्वर महादेव मंदिर को अलग पहचान देती है. यही वजह है कि सावन की आखिरी सोमवारी पर यह प्राचीन शिवालय एक बार फिर आस्था के बड़े केंद्र के रूप में नजर आ रहा है.
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