हिंदू धर्म में भाई-बहन के रिश्ते को बहुत खास माना जाता है. इस रिश्ते में प्यार, अपनापन और एक-दूसरे की चिंता होती है. भाई-बहन के इसी प्यार को मनाने के लिए साल में दो बड़े त्योहार आते हैं. पहला रक्षाबंधन और दूसरा भाई दूज. दोनों त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित हैं, लेकिन इन्हें मनाने का तरीका और इनके पीछे की कहानी अलग-अलग है.
रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, जबकि भाई दूज पर बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है. लेकिन क्या आप भाई दूज और रक्षाबंधन के बीच के अंतर को जानते हैं? साथ ही क्या है इनका धार्मिक महत्व?
कब मनाया जाता है भाई दूज और रक्षाबंधन?
रक्षाबंधन का त्योहार हर साल सावन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है. वहीं भाई दूज का त्योहार दिवाली के दो दिन बाद कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन बहन अपने भाई को घर बुलाती है, उसका तिलक करती है और उसके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है.
रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?
रक्षाबंधन को लेकर कई धार्मिक कहानियां प्रचलित हैं. इनमें एक प्रसिद्ध कहानी भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी है. मान्यता है कि एक बार भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लग गई थी. तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था. द्रौपदी के इस प्रेम को देखकर भगवान कृष्ण ने हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन दिया था. इसी वजह से रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्यार और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है.
भाई दूज क्यों मनाया जाता है?
भाई दूज से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कहानी भगवान यमराज और उनकी बहन यमुना की है. मान्यता है कि एक बार कार्तिक महीने की द्वितीया तिथि को यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने पहुंचे. यमुना ने उनका स्वागत किया, माथे पर तिलक लगाया और अपने हाथों से भोजन कराया. बहन का प्यार देखकर यमराज बहुत खुश हुए और उन्होंने वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक लगवाएगा, उसे लंबी उम्र और सुख का आशीर्वाद मिलेगा. इसी कारण भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है.
भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या है सबसे बड़ा अंतर?
रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुरक्षा और खुशहाली की कामना करती है. वहीं भाई दूज पर बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है. रक्षाबंधन में राखी बांधने की परंपरा मुख्य है, जबकि भाई दूज में तिलक, आरती और भाई को भोजन कराने का विशेष महत्व है. दोनों त्योहार भाई-बहन के प्यार और विश्वास को मजबूत करते हैं.