Advertisement

Brihaspativar Vrat: बृहस्पतिवार व्रत का क्या है महत्व, जानें यह ग्रह दे रहा है विवाह में बाधा तो क्या करें उपाय?

बृहस्पति किसी महिला के विवाह का सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है. बिना बृहस्पति के किसी महिला का विवाह हो ही नहीं सकता. बृहस्पति किसी पुरुष के जीवन में उसके जीवनसाथी के बारे में बताता है. बृहस्पतिवार के व्रत से मुख्यतः श्री हरि और बृहस्पति देव की कृपा मिल सकती है. 

Lord Vishnu and Brihaspati Dev
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:34 PM IST

हर दिन का संबंध एक ग्रह से होता है. उस दिन उस ग्रह की पूजा करके और उपवास रखकर हम उस ग्रह को मजबूत कर सकते हैं. बृहस्पतिवार के व्रत से मुख्यतः श्री हरि और बृहस्पति देव की कृपा मिल सकती है. श्री हरि की कृपा से संपत्ति और सम्पन्नता दोनों मिल सकती है. बृहस्पति देव की कृपा से संतान और विवाह की समस्याएं दूर हो सकती हैं. यह व्रत हर प्रकार से सुख, शांति और समृद्धि देता है. 

किनके लिए बृहस्पतिवार व्रत रखना होगा लाभकारी 
जिनकी कुंडलियों में बृहस्पति कमजोर हो, जिनका विवाह न हो पा रहा हो या वैवाहिक जीवन खराब हो, जिनको संतान संबंधी कोई भी समस्या हो, जिनको पेट या मोटापे की कोई समस्या हो, महिलाओं के लिए बृहस्पतिवार व्रत रखना हर प्रकार से अनुकूल होता है. 

कैसे रखें बृहस्पतिवार व्रत 
प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें. इसके बाद सूर्य देव को हल्दी मिलकर जल अर्पित करें. फिर केले के पौधे में जल अर्पित करें. बृहस्पति के मंत्रों का जाप करें. चाहें तो बृहस्पति व्रत कथा भी कह और सुन सकते हैं. दिन में केवल जल और फल पर उपवास रखें. संध्याकाल को पुनः मंत्र जाप करें. 

बृहस्पतिवार व्रत की सावधानियां 
जहां तक हो सके जल और फल ग्रहण करके उपवास रखें. अगर एक वेला आहार ग्रहण करना है तो नमक का सेवन न करें. सूर्यास्त के पूर्व मीठी पीली चीज का सेवन कर सकते हैं. इस दिन घर में भी सात्विकता बनाए रखें. 

क्या बृहस्पति भी विवाह में देता है समस्या 
बृहस्पति किसी महिला के विवाह का सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है. बिना बृहस्पति के किसी महिला का विवाह हो ही नहीं सकता. बृहस्पति किसी पुरुष के जीवन में उसके जीवनसाथी के बारे में बताता है. बृहस्पति ही पुरुष के वैवाहिक जीवन को संतुलित करता है. अगर बृहस्पति विवाह में बाधा दे तो विवाह का होना और निभना दोनों चुनौती हो जाता है. बृहस्पति की कुछ स्थितियां व्यक्ति के विवाह के लिए काफी समस्याएं पैदा करती हैं. 

बृहस्पति की पहली स्थिति कौन सी है जो विवाह में बाधा पैदा करती है
बृहस्पति की पहली स्थिति है- नीच का बृहस्पति है. अगर बृहस्पति मकर राशि में हो तो नीच का हो जाता है. ऐसी स्थिति में जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और विवाह में विलम्ब होता है. कभी-कभी व्यक्ति के अंदर असंतोष का भाव भी आ जाता है. विवाह के बाद शुरू में वैवाहिक तालमेल में भी दिक्कत आती है. 

उपाय: नित्य प्रातः स्नान और उपासना जरूर करें. चन्दन की सुगंध का नियमित प्रयोग करें. तर्जनी अंगुली में सोने या पीतल का छल्ला धारण करें. एक हल्दी की गांठ पीले धागे में गले में धारण करें. नीलम या शनि का रत्न धारण न करें. 

बृहस्पति की दूसरी स्थिति कौन सी है जो करती है विवाह में बाधा पैदा 
बृहस्पति की दूसरी स्थिति है- गुरु चांडाल योग है. अगर कुंडली में राहु बृहस्पति का योग हो तो इसे गुरु चांडाल योग होता है. यह व्यक्ति को उत्श्रृंखल बना देता है. व्यक्ति गंभीर नहीं होता, विवाह का समय बीतता चला जाता है. विवाह के बाद भी वैवाहिक जीवन में ईमानदारी नहीं रहती. 

उपाय: नित्य प्रातः सूर्य को हल्दी मिलाकर जल अर्पित करें. गायत्री मंत्र का जप अवश्य करें. मांस मदिरा आदि का सेवन न करें. सलाह लेकर एक पन्ना या मोती धारण करें. दाढ़ी और बाल बड़े न रखें. 

बृहस्पति की तीसरी स्थिति कौन सी है जो विवाह में करती है बाधा पैदा 
बृहस्पति की तीसरी स्थिति- सप्तम भाव में बृहस्पति की है. बृहस्पति जिस भाव में रहता है उसका नाश कर देता है. सप्तम स्थान का बृहस्पति विवाह के लिए काफी खराब होता है. विवाह होने में अति विलम्ब होता है. कभी-कभी तो विवाह ही नहीं होता. वैवाहिक जीवन में अहंकार के कारण समस्या पैदा हो जाती है. 

उपाय: देर रात तक जगने से बचें. माथे पर या कंठ पर तिलक जरूर लगाएं. गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ जरूर करें. भूलकर भी पीला पुखराज न पहनें. एक ओपल अवश्य धारण कर लें. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement