Jitiya Vrat 2026
Jitiya Vrat 2026
हिंदू धर्म में जितिया व्रत का विशेष महत्व है. हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत (Jitiya Vrat) रखा जाता है. जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत (Jivitputrika Vrat) भी कहा जाता है. इस दिन माताएं संतान की लंबी उम्र, सुरक्षा और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जितिया व्रत का पुण्य संतान के हर कार्य में अमृत बनकर घुल जाता है.
आपको मालूम हो कि जितिया व्रत को काफी कठिन माना गया है क्योंकि माताएं पूरे 36 घंटे का निर्जला उपवास रखने का बाद व्रत का पारण करती हैं. जितिया व्रत तीन दिनों तक चलता है. इस व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है. इस साल जितिया व्रत की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बन रही है. आइए जानते हैं साल 2026 में जितिया व्रत की सही तिथि क्या है और नहाय-खाय व पारण की तारीख क्या है?
कब रखा जाएगा जितिया व्रत
हिंदू पंचाग के मुताबिक इस साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक जितिया व्रत 3 अक्टूबर दिन शनिवार को रखा जाएगा.
क्या है जितिया व्रत 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
जितिया व्रत की पूजा विधि
जितिया व्रत की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है. इसके दूसरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. जितिया व्रत के दिन सबसे पहले एक साफ चौकी पर भगवान जीमूतवाहन की तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद भगवान जीमूतवाहन को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें और फूलों की माला चढ़ाएं. फिर दीप-धूप जलाएं और भगवान को मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद रोली, फल, भोग और दूर्वा अर्पित करें. फिर जितिया व्रत की कथा पढ़ें और अंत में भगवान जीमूतवाहन की आरती करें. तीसरे दिन ब्रह्मामुहूर्त में उठकर स्नानादि करने और पूजा-पाठ करने के बाद व्रत का पारण करें. आपको मालूम हो कई घरों में गाय के गोबर से लीपकर सियारिन और चील बनाए जाते हैं और इसके पश्चात प्रतिमा पर लाल सिंदूर से टीका लगाते हैं.