चंदन एक खास तरह की सुगंधित लकड़ी है. यह सेंटलिस कुल का पौधा है, जिसकी सुगंध बेमिसाल होती है. यह पौधा जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे ही इसके तने और जड़ों में सुगंधित तेल का अंश भी बढ़ने लगता है. चंदन की लकड़ी का उपयोग मूर्तिकला, साज-सज्जा के सामान, सुगन्धित पदार्थ आदि बनाने में होता है. मुख्यतः चंदन दो प्रकार लाल और सफेद होता है. दोनों का ही खूब प्रयोग किया जाता है.
चंदन का धार्मिक महत्व
हिन्दू धर्म में चंदन को अत्यंत पवित्र माना जाता है. पूजा के हर कार्य में चंदन की लकड़ी, चंदन का लेप और चंदन के इत्र का प्रयोग किया जाता है. शिवलिंग का अभिषेक भी चंदन से करने की परंपरा है. श्री हरि और उनके अवतारों के लिए सफेद चंदन का लेपन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि देवी की उपासना में लाल चंदन ज्यादा प्रयोग होता है. बौद्ध धर्म में चंदन के प्रयोग से ध्यान करने की परंपरा बताई गई है. ज्योतिष में ग्रहों की समस्या के समाधान के लिए भी चंदन का प्रयोग किया जाता है.
चंदन के चमत्कारी प्रयोग क्या
चंदन का तिलक लगाने से मन शांत एकाग्र होता है. चंदन के तिलक से क्रोध और तनाव की स्थिति में सुधार होता है. चंदन की लकड़ी धारण करने से राहु केतु की बाधा दूर होती है. चंदन की सुगंध से नजर दोष और अवसाद की समस्या दूर होती है. चंदन की माला से मन्त्र जप करने से आकर्षण में वृद्धि होती है.
कैसे लगाना चाहिए चंदन
चंदन लगाने के भी कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं. सबसे पहले नियम तो यही है कि ईश्वर की आराधना में प्रयुक्त होने के कारण जब भी चंदन का तिलक लगाएं, तिलक लगाने से पूर्व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए. दिशा की बात की जाए तो उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके चंदन का टीका लगाना शुभ माना गया है. चंदन का टीका हमेशा ललाट बिंदु यानी भावों के मध्य में ही लगाना चाहिए. बिना स्नान किए तिलक या चंदन न लगाए. पहले अपने इष्ट या भगवान को तिलक लगाएं, फिर खुद को तिलक लगाए. खुद को अनामिका उंगली से और दूसरों को अंगूठे से तिलक लगाएं. तिलक लगाकर कभी भी सोना नहीं चाहिए. आमतौर पर चंदन, कुमकुम, मिट्टी, हल्दी और भस्म आदि से तिलक लगाने का विधान है. अगर आप चंदन का प्रयोग जीवन में करना शुरू कर दें तो जीवन की तमाम परेशानियों से खुद बा खुद छुटकारा मिल सकता है, क्योंकि चंदन के तिलक से ग्रहों को मजबूती मिलती है.