धनतेरस का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत खास माना जाता है. इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा करते हैं. मान्यता है कि धनतेरस पर पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है. इस दिन यमराज के नाम से दीपक जलाने की भी परंपरा है. इसे यम दीपदान कहा जाता है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन यमराज के नाम का दीपक जलाने से परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. चलिए बताते हैं कि इस धनतेरस यम का दीपक जलाने का सही समय, दिशा और पूजा की पूरी विधि.
यम का दीपक कब जलाना चाहिए?
धनतेरस के दिन यमराज के नाम का दीपक शाम के समय जलाना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में यम दीपदान करना चाहिए. घर के सभी सदस्य जब वापस आ जाएं, तब यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है. इसलिए इस पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद का समय चुनना अच्छा माना जाता है.
यम का दीपक किस दिशा में रखना चाहिए?
यम दीपदान करते समय सही दिशा का ध्यान रखना बहुत जरूरी माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमराज का संबंध दक्षिण दिशा से है. इसलिए यम का दीपक घर के मुख्य दरवाजे के बाहर रखना चाहिए. ध्यान रखें कि दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर हो.
यम दीपक जलाने की सही विधि क्या है?
धनतेरस पर यम दीपक जलाने के लिए मिट्टी का दीपक लेना अच्छा माना जाता है. इसकी पूजा करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें.
किस मंत्र का करें जप?
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह.
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥
इस मंत्र का भाव है कि धनतेरस के दिन दीपदान करने से सूर्यपुत्र यमराज प्रसन्न हों और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें.
धनतेरस पर यम दीपदान का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना पूरी होती है. इसी कारण इस दिन यम दीपदान को विशेष महत्व दिया जाता है. दीपक जलाते समय परिवार की सुरक्षा, सुख और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करनी चाहिए.