सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, आस्था और तप का प्रतीक माना जाता है. इस पूरे महीने शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और लाखों श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए लंबी यात्राएं तय करते हैं. झारखंड के धनबाद में भी ऐसी ही एक अनोखी मिसाल देखने को मिली है, जहां 60 वर्षीय रेणु देवी पिछले 28 वर्षों से सावन के हर सोमवार डाक बम बनकर बाबा बैद्यनाथ धाम में जल चढ़ाने जाती हैं. उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह और अटूट विश्वास युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है.
1998 में लिया था संकल्प, आज तक नहीं टूटी परंपरा
रेणु देवी ने बताया कि वर्ष 1998 में उन्होंने पहली बार सावन के प्रत्येक सोमवार डाक बम बनकर बाबा बैद्यनाथ धाम में जल चढ़ाने का संकल्प लिया था. तब से लेकर आज तक उन्होंने बिना नागा इस परंपरा को निभाया है. उनका कहना है कि जब तक बाबा भोलेनाथ की कृपा और बुलावा रहेगा, तब तक वह इसी तरह जलाभिषेक करती रहेंगी. उनका कहना है कि डाक बम की वेशभूषा धारण करते ही उनके भीतर एक अलग ही ऊर्जा का संचार होता है. लंबी और कठिन यात्रा के बावजूद उन्हें न थकान महसूस होती है और न ही किसी तरह का दर्द. इस यात्रा में उनका पूरा जत्था भी साथ चलता है, जो हर कदम पर उनका सहयोग करता है.
'बाबा ने मुझे भक्त बनाया, इससे बड़ा आशीर्वाद क्या होगा'
जब उनसे मनोकामना के बारे में पूछा गया तो रेणु देवी भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि बाबा भोलेनाथ ने उन्हें अपना भक्त बनाया, यही उनके लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है. उनका परिवार सुखी और स्वस्थ है, इसलिए उन्हें अपने लिए भगवान से कुछ नहीं चाहिए. उनकी बस यही प्रार्थना है कि भोलेनाथ की कृपा सभी पर बनी रहे और हर परिवार सुख, शांति और समृद्धि के साथ जीवन बिताए. इसी कृतज्ञता के भाव से वह हर सावन सोमवार बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करने जाती हैं. वहीं, उनके पति ने बताया कि वह वर्ष 1986 से लगातार देवघर जाकर सावन के हर सोमवार बाबा बैद्यनाथ पर जल चढ़ा रहे हैं और आगे भी यह परंपरा जारी रखेंगे.
क्या होता है डाक बम?
डाक बम कांवड़ यात्रा का सबसे कठिन स्वरूप माना जाता है. इसमें श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल भरने के बाद लगभग 105 किलोमीटर की दूरी तय कर 24 घंटे के भीतर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं. इस दौरान वे बीच रास्ते में कहीं रुकते नहीं हैं और न ही किसी दूसरे स्थान पर जल रख कर आराम करते हैं. डाक बम यात्रा में कांवड़ को जमीन पर रखना भी वर्जित माना जाता है. श्रद्धालु पूरे मार्ग में इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि गंगाजल अशुद्ध न हो और बिना रुके सीधे बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचे.
सुईया पहाड़ को माना जाता है सबसे कठिन पड़ाव
सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले मार्ग में कई पहाड़ी रास्ते पड़ते हैं, लेकिन सुईया पहाड़ को डाक बम कावड़िए के लिए सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है. यहां की खड़ी चढ़ाई और दुर्गम रास्ता श्रद्धालुओं के धैर्य और शारीरिक क्षमता की परीक्षा लेता है. इसके बावजूद शिवभक्त पूरे उत्साह और 'बोल कवड़िया बोल बम' के जयघोष के साथ इस मार्ग को पार करते हैं.
क्या है सावन मास का महत्व?
हिंदू धर्म में सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस महीने सात्विक जीवन अपनाकर, व्रत रखकर, शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं. इस दौरान श्रद्धालु सात्विक भोजन करते हैं, संयम का पालन करते हैं और पूरे मन से शिव आराधना में लीन रहते हैं. मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद दिलाती है.
(इनपुट- सिथून कुमार मोदक)
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