राजस्थान के धौलपुर में ऐतिहासिक तीर्थराज मचकुंड का प्रसिद्ध लक्खी मेला आज संतों के शाही स्नान के साथ शुरू हो गया. ऋषि पंचमी से देवछठ तक चलने वाले इस मेले में राजस्थान के साथ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. देवछठ के दिन मचकुंड सरोवर में स्नान को लेकर खास धार्मिक मान्यता है.
मेले की शुरुआत के मौके पर ग्वालियर, मुरैना, अयोध्या, वृंदावन, मथुरा और आसपास के जिलों से संतों की सवारियां मंगल भारती मंदिर से निकलीं. बैंड-बाजों के साथ संत मचकुंड सरोवर पहुंचे, जहां उन्होंने शाही स्नान किया. इसके बाद संतों ने तीर्थराज मचकुंड की पूजा-अर्चना की और दो दिन तक चलने वाले मेले का शुभारंभ किया.
देवछठ पर स्नान की खास मान्यता
मचकुंड को सभी तीर्थों का भांजा माना जाता है. मान्यता है कि देवछठ के दिन यहां सरोवर में स्नान करने से श्रद्धालुओं को पुण्य लाभ मिलता है. यही वजह है कि हर साल राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के आसपास के इलाकों से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
मचकुंड मेले से जुड़ी धार्मिक मान्यता के अनुसार देवासुर संग्राम के बाद राक्षस कालयवन के अत्याचार बढ़ गए थे. तब भगवान श्रीकृष्ण ने कालयवन को युद्ध के लिए ललकारा. मान्यता है कि बाद में भगवान कृष्ण ने मचकुंड महाराज की मदद से कालयवन का वध कराया. इसके बाद ब्रजवासियों को उसके अत्याचारों से मुक्ति मिली. तभी से मचकुंड को धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है.
नवविवाहित जोड़े भी पहुंचते हैं
मेले में हजारों नवविवाहित जोड़े भी पहुंचते हैं. मान्यता के अनुसार स्नान और पूजा के बाद नवविवाहित जोड़ों के सहरे की कलंगी या मोहरी को मचकुंड सरोवर में प्रवाहित किया जाता है. ऐसा वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए किया जाता है. मान्यता है कि चार धाम की यात्रा के बाद मचकुंड में स्नान करने से तीर्थ यात्रा पूरी मानी जाती है.
इसी वजह से मेले में भारी भीड़ जुटती है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
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